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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 381 of 918

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Page 381

प्र० ६६ : अ० १० ] वास्तुक ( ३ ) २९७

(१) सस्यभक्षणे सस्योपघातं निष्पत्तितः परिसंख्याय द्विगुणं दापयेत् ।
(२) स्वामिनश्चानिवेद्य चारयतो द्वादशपणो दण्डः । प्रमुञ्चतश्चतुर्विंशतिपणः । पालिनामर्धदण्डः । तदेव षण्डभक्षणे कुर्यात् । वाटभेदे द्विगुणः । वेश्मखलवलयगतानां च धान्यानां भक्षणे । हिंसाप्रतीकारं कुर्यात् ।
(३) अभयवनमृगाः परिगृहीता वा भक्षयन्तः स्वामिनो निवेद्य यथाऽवध्यास्तथा प्रतिषेद्धव्याः ।
(४) पशवो रश्मिप्रतोदाभ्यां वारयितव्याः । तेषामन्यथा हिंसायां दण्डपारुष्यदण्डाः । प्रार्थयमाना दृष्टापराधा वा सर्वोपायैर्नियन्तव्याः । इति क्षेत्रपथहिंसा ।
(५) कर्षकस्य ग्राममभ्युपेत्याकुर्वतो ग्राम एवात्ययं हरेत् । कर्माकरणे कर्मवेतनाद् द्विगुणं, हिरण्यादाने प्रत्यंशद्विगुणं, भक्ष्यपेयादाने च प्रहवणेषु द्विगुणमंशं दद्यात् ।


(१) यदि किसी का जानवर किसी की खड़ी खेती को चर जाय तो अन्न के नुकसान का दुगुना दाम खेत के मालिक को दिलाया जाय ।

(२) लुका-छिपा कर यदि कोई अपने पशु से दूसरे का खेत चरवाये उसको बारह पण दण्ड दिया जाय । जो अपने पशु को किसी के खेत में चरने के लिए छोड़ दे उसे चौबीस पण दण्ड दिया जाय । इस प्रकार खेतों का नुकसान होने पर खेतों के रखवालों को पूर्वोक्त दण्डों का आधा दण्ड दिया जाय । यदि खेत को कोई साँड़ चर जाय तब भी रखवाले पर इतना ही जुर्माना किया जाय । खेत की बाड़ टूट जाने पर रखवाले पर दुगुना दण्ड किया जाय । घर, खलिहान और बाड़ी हुई जगहों का अन्न यदि पशु खा जाँय तो हानि के बराबर मूल्य देना चाहिए ।

(३) यदि आश्रमों के मृग खेतों को चरते हुए पकड़े जाँय तो रखवाला इसकी खबर अपने मालिक को कर दे और उन मृगों को इस प्रकार खेतों से बाहर करे, जिससे उन पर कोई चोट न लगे या वे मरने न पावें ।

(४) पशुओं को रस्सी या कोड़े से हटाना चाहिए । यदि उनको कोई अनुचित ढङ्ग से मारे या हटाये तो उसे 'दण्डपारुष्य' प्रकरण के अनुसार यथोचित दण्ड दिया जाना चाहिए । किन्तु जो हटाने वालों का मुकाबला करें या पहिले कभी किसी को मारते हुए देखे गये हों उनको अनुचित ढङ्ग से भी मारा या हटाया जा सकता है । यहाँ तक खेतों और रास्तों के नुकसान के सम्बन्ध में निरूपण किया गया ।

(५) सामूहिक कार्यों में सामिल न होने का मुआवजा—यदि कोई किसान गाँव में आकर पञ्चायती या खेती आदि का कार्य न करे तो गाँव उससे यथोचित जुर्माना वसूल कर ले । यदि कोई व्यक्ति कार्य न करे तो कार्य के वेतन से दुगुना; पञ्चायती कार्यों में चन्दा न दे तो चन्दे का दुगुना और सामुहिक खान-पान के अवसर पर शरीक न हो तो उसका दुगुना; दण्ड उससे वसूल किया जाय ।