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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 375 of 918

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Page 375

प्र० ६५ : अ० ६ ] वास्तुक ( २ ) २९१

(१) प्रसह्यादाने वास्तुनि स्तेयदण्डः । कारणादाने प्रयासमाजीवं च परिसङ्ख्याय बन्धं दद्यात् । मर्यादापहरणे पूर्वः साहसदण्डः । मर्यादाभेदे चतुर्विंशतिपणः ।

(२) तेन तपोवनविवीतमहापथश्मशानदेवकुलयजनपुण्यस्थानविवादा व्याख्याताः । इति मर्यादास्थापनम् ।

(३) सर्व एव विवादाः सामन्तप्रत्ययाः । विवीतस्थलकेदारषण्डखल-वेश्मवाहनकोष्ठानं पूर्वं पूर्वमाबाधं सहेत ।

(४) ब्रह्मसोमारण्यदेवयजनपुण्यस्थानवर्जः स्थलप्रदेशः ।

(५) आधारपरिवाहकेदारोपभोगैः परक्षेत्रकृष्टबीजहिंसायां यथोपघातं मूल्यं दद्युः । केदारारामसेतुबन्धानां परस्परहिंसायां हिंसाद्विगुणो दण्डः ।


ले, जिसका कोई वारिस न हो । या जनता की लाभ की दृष्टि से उनका यथोचित विभाग कर दे ।

( १ ) जो व्यक्ति मकान, भूमि आदि अचल सम्पत्ति पर नाजायज कब्जा करे उसे चोरी का दण्ड किया जाय । किन्तु, यदि ऋण आदि के बदले कब्जा करे तो कब्जेदार को चाहिए कि वह सम्पत्ति के मालिक के शारीरिक श्रम का फल और कर्जे की अपेक्षा सम्पत्ति का जो अधिक मूल्य बैठे, उसका हिसाब मालिक को अदा कर दे । सीमाबन्दी को सरकाने पर प्रथम साहस दण्ड और सीमा-चिह्नों को मिटाने पर चौबीस पण दण्ड दिया जाय ।

( २ ) इसी प्रकार तपोवन, चारागाह, बड़ी सड़कें, श्मशान, देवालय, यज्ञस्थान और दूसरे पुण्यस्थानों के विवादास्पद विषयों का भी निर्णय करना चाहिए । यहाँ तक सीमाविषयक विवाद पर निर्णय का विधान वर्णन किया गया ।

( ३ ) मिश्रित विवाद—सब तरह के विवादों का निर्णय मुखिया ( सामन्त ) लोगों को करना चाहिए । चरागाह, खेती योग्य जमीन, खलिहान, मकान और घुड़साल, इनके सम्बन्ध में विवाद उपस्थित होने पर क्रमशः पहिले को प्रधानता देते हुए निर्णय किया जाय ।

( ४ ) ब्रह्मारण्य, सोमारण्य, देवस्थान, यज्ञस्थान और अन्य पुण्यस्थानों को छोड़कर आवश्यकता होने पर सभी जगह खेती करायी जा सकती है ।

( ५ ) जलाशय, क्यारी तथा नाली बनाते समय यदि किसी के बीज बोये खेत का नुकसान हो जाय तो हानि के अनुसार उसका मूल्य चुका देना चाहिए । यदि कोई व्यक्ति खेत, बाग-बगीचा और सीमाबन्ध आदि को एक-दूसरे के बदले में नुकसान पहुँचायें तो उन्हें नुकसान का दुगुना दण्ड देना चाहिए ।