कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in context| प्रकरण ६० | विवाहसंयुक्तं; निष्पतनं; पथ्यनुसरणं; ह्रस्वप्रवासो; दीर्घप्रवासश्च; |
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| अध्याय ४ |
(१) प्रतिकुलान्निष्पतितायाः स्त्रियाः षट्पणो दण्डोऽन्यत्र विप्रकारात् । प्रतिषिद्धायां द्वादशपणः । प्रतिवेशगृहातिगतायाः षट्पणः ।
(२) प्रातिवेशिकभिक्षुकवैदेहकानामवकाशभिक्षापण्यादाने द्वादशपणो दण्डः, प्रतिषिद्धानां पूर्वः साहसदण्डः । परगृहातिगतायाश्चतुर्विंशतिपणः ।
(३) परभार्यावकाशदाने शत्यो दण्डोऽन्यत्रापद्भूयः । वारणाज्ञानयोर्निर्दोषः ।
(४) प्रतिविप्रकारात् पतिज्ञातिसुखावस्थग्रामिकान्वाविभिक्षुकीज्ञाति-कुलानामन्यतममपुरुषं गन्तुमदोष, इत्याचार्याः ।
विवाह सम्बन्ध
परिणीता का निष्पतन : परपुरुष का अनुसरण : पुनर्विवाह की स्थिति
( १ ) स्त्रियों का घर से बाहर जाना : पतिघर से भागी हुई स्त्री पर छह पण का दण्ड दिया जाय, किन्तु यदि वह किसी भय के कारण भागे तो अदण्ड्य समझी जाय। पति के रोकने पर भी यदि कोई स्त्री घर से भाग निकले तो उस पर बारह पण दण्ड किया जाय। यदि वह पड़ोसी के ही घर में चली जाय तो उसे छह पण का दण्ड दिया जाय।
( २ ) पति की आज्ञा के बिना पड़ोसी को अपने घर में पनाह देने, भिखारी को भीख देने और व्यापारी को किसी तरह का माल देने वाली स्त्री को बारह पण दण्ड दिया जाय। यदि कोई स्त्री निषिद्ध व्यक्तियों के साथ यही व्यवहार करे तो उसे प्रथमसाहस दण्ड दिया जाय। यदि वह निर्दिष्ट सीमा के घरों से बाहर जाये तो उसे चौबीस पण दण्ड दिया जाय।
( ३ ) विपत्तिरहित किसी परपत्नी को अपने घर में पनाह देने वाले पर सौ पण का दण्ड किया जाय। यदि कोई स्त्री गृहस्वामी के रोकने पर या छिपकर उसके घर में घुस जाय तो उस स्थिति में गृहस्वामी निरपराध समझा जाय।
( ४ ) कुछ आचार्यों का अभिमत है कि पति से तिरस्कृत कोई स्त्री यदि अपने पति के सम्बन्धी पुरुषरहित घर में जाय या सुख-संपन्न, गाँव के मुखिया, अपने धन