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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 333 of 918

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Page 333

प्र० ५५ : अ० ३६ ] नागरिक के कार्य २४९

(१) शङ्कनीये देशे लिङ्गे पूर्वापदाने च गृहीतमनुयुञ्जीत ।
(२) राजपरिग्रहोपगमने नगररक्षारोहणे च मध्यमः साहसदण्डः ।
(३) सूतिकाचिकित्सकप्रेतप्रदीपयानानागरिकतूर्यप्रेक्षाग्निनिमित्तं द्राभिश्चाग्राह्याः ।
(४) चाररात्रिषु प्रच्छन्नविपरीतवेषाः प्रव्रजिता दण्डशस्त्रहस्ताश्च मनुष्या दोषतो दण्ड्याः ।
(५) रक्षिणामवार्यं वारयतां वार्यं चावारयतामक्षणद्विगुणो दण्डः । स्त्रियं दासीमधिमेहयतां पूर्वः साहसदण्डः, अदासीं मध्यमः, कृतावरोधामुत्तमः, कुलस्त्रियं वधः ।
(६) चेतनाचेतनिकं रात्रिदोषमशंसतो नागरिकस्य दोषानुरूपो दण्डः, प्रमादस्थाने च ।


( १ ) उक्त रोक लगे समय में यदि कोई व्यक्ति बगीचों में छिपे हुये पाये जाँय, या जिनके पास ऐसा सामान पाया जाय कि उन पर चोर-डाकू होने का शक किया जा सके, अथवा जो पहिले से ही बदनाम हों और इस प्रकार घूमते हुए मिल जांय तो उनसे पूछा जाना चाहिए 'तुम कौन हो ? कहाँ से आये हो ? कहाँ जाओगे ? क्या कार्य करते हो ? यहाँ तुम क्यों आये हो ?' यदि वे सन्तोषजनक उत्तर दें तो उनके साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए ।

( २ ) यदि इस प्रकार का कोई शंकित व्यक्ति सरकारी इमारतों या नगर-रक्षा के लिए बने सफ़ीलों अथवा दुर्गों के ऊपर चढ़ता हुआ पकड़ा जाय तो उसे मध्यम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( ३ ) यदि उक्त रोक लगे समय में प्रसूता स्त्री, वैद्य हकीम, मुर्दाफ़रोश, उजाला लिए, सूचनार्थ आवाज करते हुए, नाटक-सिनेमा देखने, आग बुझाने आदि के लिए और जिनके पास राजकीय अनुमतिपत्र हो, आते-जाते पकड़ लिये जायें तो उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहिए ।

( ४ ) विशेष उत्सवों के समय रात्रि में रोक हटा दी जाने पर जो व्यक्ति मुँह ढँककर अथवा वेष बदलकर तथा संन्यासी के वेष में दण्ड या हथियार लिए पकड़े जाय, उन्हें अपराध के अनुसार दण्ड देना चाहिए ।

( ५ ) जो पहरेदार रोके जाने योग्य व्यक्तियों को न रोक लें तो उन्हें, रोक लगे समय के अपराध से दुगुना अर्थात् ढाई पण दण्ड देना चाहिए । जो पुरुष दूसरे की स्त्री तथा दासी के साथ बलात्कार करे, उसे प्रथम साहस दण्ड देना चाहिए । दासी आदि के अलावा किसी वेश्या के साथ बलात्कार करने पर मध्यम साहस दण्ड देना चाहिए । यदि कोई दासी या वेश्या किसी की पत्नी बन चुकी हो और तब उसके साथ कोई बलात्कार करे तो उसे उत्तम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए । जो पुरुष कुलीन स्त्रियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करे उसको प्राणदण्ड की सजा देनी चाहिए ।

( ६ ) जान-बूझकर या अनजाने में, रात को किये गये अपराधों की सूचना