कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in context| प्रकरण ५१-५२ | # मुद्राध्यक्षः विवीताध्यक्षः |
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| अध्याय ३४ |
(१) मुद्राध्यक्षो मुद्रां माषकेण दद्यात् ।
(२) समुद्रो जनपदं प्रवेष्टुं निष्क्रमितुं वा लभेत ।
(३) द्वादशपणममुद्रो जानपदो दद्यात् । कूटमुद्रायां पूर्वः साहसदण्डः । तिरोजनपदस्योत्तमः ।
(४) विवीताध्यक्षो मुद्रां पश्येत् ।
(५) भयान्तरेषु च विवीतं स्थापयेत् । चोरव्यालभयान्निम्नारणयानि शोधयेत् ।
मुद्राविभाग और चारागाहविभाग के अध्यक्ष
( १ ) मुद्रा-विभाग का अध्यक्ष : मुद्रा-विभाग के अध्यक्ष को चाहिए कि वह जनपद में आनेवाले और नगर से जानेवाले प्रत्येक व्यक्ति को राजकीय मुहर लगा हुआ पासपोर्ट दे तथा बदले में एक माषक टैक्स वसूल करे ।
( २ ) जिस व्यक्ति के पास पासपोर्ट हो वही जनपद में प्रवेश कर सकता है और वही जनपद से बाहर जा सकता है ।
( ३ ) अपने जनपद में रहनेवाला कोई पुरुष बिना पासपोर्ट के यदि प्रवेश करे या बाहर जाये तो उस पर बारह पण दण्ड किया जाना चाहिए । अपने ही राज्य का कोई व्यक्ति यदि जाली पासपोर्ट लेकर आना-जाना चाहे तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए, यदि दूसरे देश का व्यक्ति ऐसा करे तो उसे उत्तम साहस दण्ड देना चाहिए ।
( ४ ) चारागाह-विभाग का अध्यक्ष : विवीताध्यक्ष का कार्य है कि जो व्यक्ति बिना पासपोर्ट या जाली पासपोर्ट लेकर छिपे तौर से जङ्गलों के रास्ते होकर सफर करते हुए पकड़ा जाय उसको गिरफ्तार कर लें ।
( ५ ) जिन स्थानों से चोर, शत्रु या शत्रु के गुप्तचर आदि के आने-जाने की संभावना हो, ऐसे स्थानों पर चारागाह ( विवीत ) स्थापित किये जाँय । चोर और हिंसक जानवरों के संभावित घने जंगलों में भी खाइयाँ और गुफाएँ बनाकर निगरानी रखनी चाहिए ।