Skip to content
SarvaKosh
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 318 of 918

Read in context
Page 318

२३४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

यन्तीक्षुरप्रमालास्तरणकुथादिकं भूषणम् । वर्मतोमरशरावापयन्त्रादिकः सांग्रामिकालङ्कारः ।
(१) चिकित्सकानीकस्थारोहकाधोरणहस्तिपकौचारिक विधापाचक-यावसिकपादपाशिककुटीरक्षकौपशायिकादिरौपस्थायिकवर्गः ।
(२) चिकित्सकुटीरक्षकविधापाचकाः प्रस्थौदनं स्नेहप्रसृतिं क्षार-लवणयोश्च द्विपलिकं हरेयुः । दशपलं मांसस्यान्यत्र चिकित्सकेभ्यः ।
(३) पथिव्याधिकर्ममदजराभितप्तानां चिकित्सकाः प्रतिकुर्य्युः ।
(४) स्थानस्याशुद्धिर्यवसस्याग्रहणं स्थले शयनमभागे घातः परा-रोहणमकाले यानमभूमावतीर्थेऽवतारणं तरुषण्ड इत्यत्ययस्थानानि । तमेषां भक्तवेतनादाददीत ।


उसके गले में बाँधने की रस्सी ( उत्तर ) । अंकुश, बाँस का डंडा और अम्बारी ( यन्त्र ) आदि उसके लिए अन्य उपकरण हैं । इसके अतिरिक्त वैजयन्ती ( हाथी के ऊपर लगाये जाने वाली पताका ), क्षुरप्रमाला ( उसको पहनाने की माला ), आस्त-रण ( अंबारी के नीचे का गद्दा ) और कुथ ( झूला ), यह सामग्री हाथियों को सजाने के लिए है । हाथियों के संग्राम-संबन्धी अलङ्करण हैं : कवच, तोमर, तूणीर और भिन्न-भिन्न प्रकार के हथियार ।

( १ ) गजवैद्य, गजशिक्षक, गजारोही, गजसंबन्धी शास्त्रोक्त विधियों का ज्ञाता, गजरक्षक, नहलाने-धुलाने वाला, खाना बनाने वाला, चारा देने वाला, बाँधने वाला, गजशाला का रक्षक और हाथी के सोने की जगह का प्रबन्ध करने वाला; ये सब हाथी की परिचर्या करने वाले कर्मचारी हैं ।

( २ ) गजवैद्य, गजशाला का रक्षक और हाथियों का रसोइया, ये तीनों हाथी के आहार में से एक प्रस्थ अन्न, आधी अञ्जली तेल या घी तथा दो पल गुड़ एवं नमक ले लिया करें । गजवैद्य को छोड़ कर बाकी दोनों सेवक दस-दस पल मांस भी ले लें ।

( ३ ) रास्ता चलने से, बीमारी के कारण, अधिक कार्य करने से, मद के कारण तथा बुढ़ापे की वजह से हाथियों को कोई भी कष्ट हो जाय तो गजवैद्य सावधानी से उनकी चिकित्सा करें ।

( ४ ) हाथी के स्थान की सफाई न करना, उसे खाना न देना, उसको खाली जगह सुला देना, उसके नाजुक स्थानों पर चोट मारना, किसी अनधिकारी व्यक्ति को उस पर चढ़ाना, बेसमय हाथी को चलाना, बिना घाट के ही उतार देना, घने पेड़ों के बीच हाथी को ले जाना; हाथियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को दण्डित किया जाना चाहिए । यह दण्ड उनके भत्ते और वेतन में से काट लिया जाय ।