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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 313 of 918

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Page 313
प्रकरण ४७# हस्त्यध्यक्षः
अध्याय ३१

(१) हस्त्यध्यक्षो हस्तिवनरक्षां दम्यकर्मक्षान्तानां हस्तिहस्तिनीकलभानां शालास्थानशय्याकर्मविधायवसप्रमाणं कर्मस्वायोगं बन्धनोपकरणं साङ्ग्रामिकमलङ्कारं चिकित्सकानीकस्थोपस्थायुकवर्गं चानुतिष्ठेत् ।
(२) हस्त्यायामद्विगुणोत्सेधविष्कम्भायामां हस्तिनीस्थानाधिकां सप्रग्रीवां कुमारीसङ्ग्रहां प्राङ्मुखीमुदङ्मुखीं वा शालां निवेशयेत् ।
(३) हस्त्यायामचतुरश्रश्लक्ष्णालानस्तम्भफलकान्तरकं मूत्रपुरीषोत्सर्गस्थानं निवेशयेत् । स्थानसमशय्यामर्धापाश्रयां दुर्गे सान्नाह्योपवाह्यानां बहिर्दम्यव्यालानाम् ।


गजशाला का अध्यक्ष

(१) गजशाला के अध्यक्ष को चाहिए कि वह हाथियों के जंगल की रक्षा करे; सिखाये जाने योग्य हाथी-हथिनी और उनके बच्चों के लिए वह गजशाला, बाँधने, उठने-बैठने के यथोचित स्थान बनवाये; वही युद्ध-सम्बन्धी कार्य, पका हुआ भोजन और हरी घास-भूसा आदि के तौल का निर्णय करे; हाथियों को हर तरह की चाल चलना सिखाये; हाथियों के अम्बारी, अंकुश आदि साजों और युद्धसम्बन्धी आभूषणों का प्रबन्ध करे; हाथियों के चिकित्सक और उनकी सेवा-टहल करने वाले कर्मचारियों पर भी अध्यक्ष नजर रखे ।

(२) हाथी के लिए उसकी लम्बाई से दुगुनी ऊँची, दुगुनी चौड़ी और दुगुनी लम्बी गजशाला बनवानी चाहिए, हथिनी के रहने की गजशाला उससे छह हाथ अधिक लम्बी होनी चाहिए, गजशाला के आगे बरामदा, उसमें बाँधने के लिये तराजू के आकार के खूंटे (कुमारी) और उसके दरवाजे पूर्व या उत्तर की ओर होने चाहिए ।

(३) हाथी की लम्बाई जितना, चौकोर, चिकना एक खूंटा वहाँ गाड़ा जाय, खूंटा एक तख्ते के बीच में लगाकर गाड़ा जाय, जिससे ऊपर की जमीन ढकी रहे और खूंटे को उखाड़ा न जा सके; पाखाना और पेशाब के लिए पीछे की ओर ढलवां स्थान बनवाना चाहिए । हाथी के सोने-बैठने के लिए एक चबूतरा-सा बनवाया जाय, जिसकी ऊँचाई साढ़े चार हाथ होनी चाहिए । युद्ध तथा सवारी के उपयोगी हाथियों की शय्या किले के भीतर ही बनवाई जाय, जो हाथी अभी सिखवा या बनैले हों उन्हें किले के बाहर ही रखना चाहिए ।