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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 277 of 918

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Page 277

प्र० ३६ : अ० २३ ] सूत व्यवसाय का अध्यक्ष १९३

(१) क्षौमदुकूलकृमितानराङ्कवकार्पाससूत्रवानकर्मान्तांश्च प्रयुञ्जानो गन्धमाल्यदानै रन्यैश्चौपग्राहिकै राराधयेत् । वस्त्रास्तरणप्रावरणविकल्पानुत्थापयेत् ।
(२) कंकटकर्मान्तांश्च तज्जातकारुशिल्पिभिः कारयेत् ।
(३) याश्चानिष्कासिन्यः प्रोषितविधवा व्यङ्गाः कन्यका वाऽऽत्मानं बिभृयुस्ताः स्वदासीभिरनुसार्य सोपग्रहं कर्म कारयितव्याः ।
(४) स्वयमागच्छन्तीनां वा सूत्रशालां प्रत्यूषसि भाण्डवेतनविनिमयं कारयेत् । सूत्रपरीक्षार्थमात्रः प्रदापः ।
(५) स्त्रिया मुखसन्दर्शनेऽन्यकार्यसम्भाषायां वा पूर्वः साहसदण्डः । वेतनकालातिपातने मध्यमः, अकृतकर्मवेतनप्रदाने च ।
(६) गृहीत्वा वेतनं कर्माकुर्वत्याः अङ्गुष्ठसन्दंशं दापयेत् । भक्षितापहृतावस्कन्दितानां च । वेतनेषु च कर्मकराणामपराधतो दण्डः ।


किया जाना चाहिए और उनसे सम्पर्क बनाये रखना चाहिए, जिससे कि कार्य में किसी प्रकार का कपट न होने पावे ।

( १ ) अध्यक्ष को चाहिए मोटे-महीन रेशमी कपड़े, चीनी रेशम, रंकु मृग की ऊन ( रांकव ) और कपास का सूत कातने-बुनने वाले कारीगरों को इत्र, फुलेल तथा अन्य पारितोषिक देकर सदा प्रसन्न चित्त रखे । उनसे वह ओढ़ने, बिछाने एवं पहनने के डिजाइनदार वस्त्र बनवाये ।

( २ ) निपुण कारीगरों से मोटे महीन सूत के कवच बनवाने चाहिए ।

( ३ ) जो स्त्रियाँ परदानसीन हों, जिनके पति परदेश गए हों, विधवा हों, जो लूली-लंगड़ी हों, जिनका विवाह न हुआ हो, जो आत्म निर्भर रहना चाहती हों, ऐसी स्त्रियों के सम्बन्ध में अध्यक्ष को चाहिए कि वह दासियों द्वारा सूत भेज कर उनसे कतवाये और उनके साथ अच्छा व्यवहार करे ।

( ४ ) घर पर काते हुए सूत को लेकर जो स्त्रियाँ स्वयं या दासियों को साथ लेकर प्रातः काल ही पुतलीघर ( सूत्रशाला ) में उपस्थित हों, उन्हें यथोचित मजदूरी दी जानी चाहिए । सूत्रशाला में अधिक सबेरा होने के कारण यदि कुछ अन्धेरा हो तो वहाँ उतना ही प्रकाश किया जाय, जिससे सूत अच्छी तरह देखा जा सके ।

( ५ ) स्त्री का मुख देखने या कार्य के अलावा इधर-उधर की बात करने वाले परीक्षक को प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए । उन्हें उचित समय पर वेतन या मजदूरी न दी जाय तो मध्यम साहस दण्ड और कार्य न करने पर भी यदि वेतन दिया जाय तब भी मध्यम साहस दण्ड देना चाहिए ।

( ६ ) जो स्त्री वेतन लेकर भी कार्य न करे उसका अंगूठा कटवा देना चाहिए ।

१३ कौ०