कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in contextप्र० ३४ : अ० १८ ] आयुधागार का अध्यक्ष १७३
पट्टनागोदरिकाः । पेटीचर्महस्तिकर्णतालमूलधमनिकाकवाटकटिकाप्रति-
हतवलाहकान्ताश्चावरणानि ।
(१) हस्तिरथवाजिनां योग्याभाण्डमालङ्कारिकं सन्नाहकल्पनाश्रोप-
करणानि । ऐन्द्रजालिकमौपनिषदिकं च कर्म ।
(२) कर्मान्तानां च,
इच्छामारम्भनिष्पत्तिं प्रयोगं व्याजमुद्दयम् ।
क्षयव्ययौ च जानीयात् कुप्यानामायुधेश्वरः ॥
इत्यध्यक्षप्रचारे द्वितीयेऽधिकरणे आयुधागाराध्यक्षो नाम अष्टादशोऽध्यायः;
आदितोऽष्टचत्वारिंशः ।
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शरीर को ढकने वाला ), ३. लोहपट्ट ( बाहों को छोड़ सारे शरीर को ढक देने वाला ), ४. लोहकवच ( केवल पीठ तथा छाती को ढक देने वाला ), ५. सूत्रकंकण ( सूत का बना कवच ) और ६. मछली, गैंडा, नीलगाय, हाथी तथा बैल, इन पाँचों के चमड़े, खुर एवं सींगों को मिलाकर बनाया हुआ कवच । इनके अतिरिक्त शिरस्त्राण ( सिर को ढक देने वाला ), कंठत्राण ( गले को ढक देने वाला ) कूर्पास ( आधी बाँहों को ढक देने वाला ), कंचुक ( घुटनों तक शरीर को ढक देने वाला ), वारवाण (सारी देह को ढक देने वाला ), पट्ट ( बिना बाहों एवं बिना लोहे का कवच ), नागोदरिका ( केवल हाथ की उङ्गलियों की रक्षा करने वाला ); ये सात प्रकार के आवरण ( कवच ) देह पर धारण किए जाने योग्य हैं । चमड़े की पेटी, मुँह ढकने का आवरण, लकड़ी की पेटी, सूत की पेटी, लकड़ी का पट्टा, चमड़ा एवं बाँस को कूट कर बनाई गई पेटी, पूरे हाथों को ढकने वाला आवरण और किनारों पर लोहे के पत्तों से बँधा आवरण; आदि अनेक प्रकार के होते हैं ।
( १ ) हाथी, घोड़ा, रथ आदि की शिक्षा एवं सजावट के साधन; अंकुश, कोड़े, पताका, कवच और शरीर की रक्षा करने वाले अन्य आवरण; ये सब उपकरण कहलाते हैं । ऐन्द्रजालिक और औपनिषदिक आदि जादू एवं प्रयोग-क्रियायें भी उपकरण कहलाती हैं ।
( २ ) कुप्य के अध्यक्ष को चाहिए कि वह पिछले दो अध्यायों में निर्दिष्ट द्रव्य-व्यापारों से सम्बद्ध कार्यों का आरम्भ एवं उनकी समाप्ति राजा की इच्छा तथा रुचि के अनुसार ही करे; उन विषयों और कार्यों की उपयोगिता, तथा हानि-लाभ को भी वह भलीभाँति समझे; आयुधागार के अध्यक्ष के लिए भी इन बातों का जानना आवश्यक है ।
अध्यक्षप्रचार नामक द्वितीय अधिकरण में आयुधागाराध्यक्ष नामक अठारहवाँ अध्याय समाप्त ।
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