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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 238 of 918

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Page 238

१५४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) तदुभयं तापनिकषाभ्यां निश्शब्दोल्लेखनाभ्यां वा विद्यात् । अभ्युद्धार्यं बदराम्ले लवणोदके वा सादयन्ति इति पेटकः ।
(२) घनसुषिरे वा रूपे सुवर्णमृन्मालुकाहिङ्गुलुककल्को वा तप्तोऽवतिष्ठते । दृढवास्तुके वा रूपे बालुकामिश्रजतुगान्धारपङ्को वा तप्तोऽवतिष्ठते । तयोस्तपनमवध्वंसनं वा शुद्धिः । सपरिभाण्डे वा रूपे लवणमुलकया कटुशर्करया तप्तमवतिष्ठते । तस्य क्वाथनं शुद्धिः । अभ्रपटलमष्टकेन द्विगुणवास्तुके वा रूपे बध्यते । तस्यापिहितकाचकस्योदके निमज्जत एकदेशः सीदति । पटलान्तरेषु वा सूच्या भिद्यते । मणयो रूप्यं सुवर्णं वा घनसुषिराणां पिङ्गः । तस्य तापनमवध्वंसनं वा शुद्धिः । इति पिङ्गः ।
(३) तस्माद्वज्रमणिमुक्ताप्रवालरूपाणां जातिरूपवर्णप्रमाणपुद्गललक्षणान्युपलभेत ।


( १ ) इन दोनों प्रकार के पेटकों की शुद्धता जाँचने के लिये उन्हें अग्नि में तपाये, कसौटी पर घिसवाये या हल्की चोट देकर या रेखा खींचकर या किसी तीक्ष्ण वस्तु से निशान देकर उनकी परीक्षा करे । अभ्युद्धार्य पेटक बेरी के कसैले रस में अथवा नमक के पानी में डालकर जाना जाय । ऐसा करने से उसका रङ्ग कुछ लाल-सा हो जाता है ।

( २ ) ठोस या पोले गहनों में सुवर्णभृत्, सुवर्णमालुका ( दोनों विशेष धातुएँ ) और शिंगरफ का चूर्ण अग्नि में तपाकर लगा दिया जाता है और उतना ही शुद्ध सोना निकाल दिया जाता है । जिस आभूषण का आधार मजबूत हो उसमें साधारण धातुओं की बालुका की लाख और सिन्दूर का घोल आग में तपाकर लगा दिया जाता है और उसके बराबर का सोना निकाल दिया जाता है । इस प्रकार के ठोस तथा पोले गहनों को आग में तपाकर उन पर चोट देने से उनकी परीक्षा करनी चाहिए । बुंदेदार मणिबन्ध जैसे गहनों को, नमक की छोटी डलियों के साथ, लपट देने वाली आग में तपाने से उनकी शुद्धि हो जाती है । बेरी के अम्ल रस में उबालकर भी उनकी शुद्धता को जाँचा जा सकता है । अभ्रक को उसके दुगुने सुवर्ण में लाख आदि से जोड़कर भी असली सोना रख लिया जाता है । उसकी परीक्षा के लिए अभ्रक लगे गहनों को बेरी के अम्ल जल में छोड़ देना चाहिये; अभ्रक लगा हिस्सा पानी में तैरता रहेगा । यदि अभ्रक की जगह ताँबा मिलाया गया हो तो सुई से छेदकर उसकी परीक्षा कर लेनी चाहिए । ठोस या पोले गहनों में काँचमणि, चाँदी और खोटा सोना मिलाकर पिंग नामक उपाय द्वारा शुद्ध सोना चुराया जा सकता है । उसको आग में तपाना तथा उसपर हथौड़े की चोट करना ही उसकी शुद्धता का उपाय है ।

( ३ ) इसलिये सौवर्णिक को चाहिए कि वह, वज्र, मणि, मुक्ता और प्रवाल की