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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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६०कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ पहला अधिकरण

(१) उपस्थितं च राज्येन मदूर्ध्वमिति सान्त्वयेत् ।
एकस्थमथ संरुन्ध्यात् पुत्रवान् वा प्रवासयेत् ॥

इति विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणेऽवरुद्धवृत्तमवरुद्धे च
वृत्तिर्नाम सप्तदशोऽध्यायः ॥

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है कि उस सर्वथा परित्याज्य राजपुत्र को वह गुप्तचरों से शस्त्र या विष आदि के द्वारा मरवा डाले । यदि अभी तक राजा ने उसका परित्याग न किया हो तो ऐसी स्थिति में समान स्वभाव वाली स्त्रियों के द्वारा मद्य आदि पिलाकर या शिकार आदि के बहाने रात में गिरफ्तार कर उसको राजा के सामने लाये जाने का यत्न किया जाय ।

( १ ) अपने पास लाये जाने पर राजा उस राजकुमार से कहे कि 'मेरे बाद इस राज्य के स्वामी तुम्हीं बनोगे' ऐसा कहकर संतुष्ट करे । यदि वह एक ही पुत्र हो और अधार्मिक साबित हो तो उसे बन्दी बनाकर रखे और यदि अनेक पुत्र हों तो उसको देशनिकाला दे दे या मरवा डाले ।

विनयाधिकारिक प्रथम अधिकरण में अवरुद्धवृत्त नामक सत्रहवाँ अध्याय समाप्त ।

—: ० :—