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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 119 of 918

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Page 119

प्र० ७ : अ० ११ ] गुप्तचरों की नियुक्ति ३५

(१) गृहीतपुत्रदारांश्च कुर्यादुभयवेतनान् ।
तांश्चारिप्रहितान् विद्यात् तेषां शौचं च तद्विधैः ॥
(२) एवं शत्रौ च मित्रे च मध्यमे चावपेच्चरान् ।
उदासीने च तेषां च तीर्थेष्वष्टादशस्वपि ॥
(३) अन्तर्गृहचरास्तेषां कुब्जवामनषण्डकाः ।
शिल्पवत्यः स्त्रियो मूकाश्चित्राश्च म्लेच्छजातयः ॥
(४) दुर्गेषु वणिजः संस्था दुर्गान्ते सिद्धतापसाः ।
कर्षकौदास्थिता राष्ट्रे राष्ट्रान्ते व्रजवासिनः ॥
(५) वने वनचराः कार्याः श्रमणाटविकादयः ।
परप्रवृत्तिज्ञानार्थाः शीघ्राश्चारपरम्पराः ॥
(६) परस्य चैते बोद्धव्यास्तादृशैरेव तादृशाः ।
चारसञ्चारिणः संस्था गूढाश्चागूढसंज्ञिताः ॥


( १ ) उभयवेतनभोगी इस प्रकार के गुप्तचरों के सम्बन्ध में विजय की इच्छा रखने वाले राजा को चाहिए कि वह उनके स्त्री-बच्चों को सत्कारपूर्वक अपने आधीन रखे । शत्रु की ओर से नियुक्त इस प्रकार के उभयवेतनभोगी गुप्तचरों की भी राजा जानकारी रखे और उनके माध्यम से अपने उभयवेतनभोगी गुप्तचरों की पवित्रता की भी परीक्षा करता रहे ।

( २ ) इस प्रकार विजिगीषु राजा को चाहिए कि वह शत्रु, मित्र, मध्यम तथा उदासीन राजाओं और उनके मन्त्री, पुरोहित, सेनापति आदि अठारह प्रकार के अधीनस्थ कर्मचारियों के निकट, सभी स्थानों पर, अपने गुप्तचरों को नियुक्त करे ।

( ३ ) इसके अतिरिक्त उन शत्रु, मित्र, मध्यम आदि राजाओं के घरों तथा उनके मन्त्री, पुरोहित आदि के घरों में भी काम करने वाले कुबड़े, बौने, नपुंसक, कारीगर स्त्रियाँ, गूँगे तथा दूसरे-दूसरे प्रकार के बहानों को लेकर म्लेच्छ जाति के पुरुषों को नियुक्त करना चाहिए ।

( ४ ) किलों में व्यापार करने वाले लोगों को, किले की सीमा पर सिद्ध तपस्वियों को, राज्य के अन्तर्गत अन्य स्थानों पर कृषक तथा उदास्थित पुरुषों को और राज्य की सीमा पर चरवाहों को, गुप्तचर वेष में नियुक्त करना चाहिये ।

( ५ ) जंगल में शत्रु की प्रत्येक गति-विधि का पता लगाने के लिए चतुर, वानप्रस्थी और जंगली लोगों को गुप्तचर नियुक्त करना चाहिए ।

( ६ ) इस प्रकार, प्रकट रूप से सामान्य स्थिति में रहते हुए ये गुप्तचर, शत्रु की ओर से नियुक्त सभी, तीक्ष्ण, कापटिक, उदास्थित आदि गुप्तचरों को अपने वर्ग के अनुसार ही चीन्हैं ।