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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

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DevanagariHindipublished361 pages

Page 92 of 361

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Page 92

६० | अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।

सम्पातवन्तं बध्नाति ॥१६॥ पाययति ॥१७॥ हरिद्रौदन-
भुक्तमुच्छिष्टानुच्छिष्टेनाप्रपदात्प्रलिप्य मन्त्रोक्तानध-
'स्तल्पे हरितसूत्रेण सव्यजङ्घासु बद्धावस्नापयति
॥ १८ ॥ प्रपादयति ॥ १९ ॥ वदत उपस्थापयति ॥ २० ॥
क्रोड्लोमानि जतुना संदिह्य जातेरूपेणापिधाप्य ॥२१॥
नक्तं जाता सुपर्णो जात इति मन्त्रोक्तं शकृदा लोहितं
प्रघृष्यालिम्पति ॥२२॥ पलितान्याच्छिद्य ॥२३॥ मारुता-

दवा है) गौ के पीठ पर जल धर कर उससे आचमन करे ॥१५॥ चमड़े
को विस्तार करने के लिये शंकु स्थापन करे ( चमड़े में शङ्कु गाड़ देवे )
उस पर बैठे रोगी को दूध को चलाता हुआ शङ्कु को रोगी के शरीर में
बाँध देवे और दूध उस रोगी को पिला देवे ॥ १६ ॥ १७ ॥ हल्दी में
मिला पकाये हुए भात को रोगी को खाने को देकर उसका बचा हुआ
उच्छिष्ट और अनुच्छिष्ट को इकट्ठा करके उसका उबटन बना कर रोगी
के शिर से लेकर पैर तक उबटन लगा कर उस को खाट पर लेटा देवे ।
शुका, काष्ठमुसुक, और गोपीतिलका इन पक्षियों को वाम जंघा में
हरे रंग के सूत से बाँध कर खाट के नीचे बान्ध देवे ॥ यह मिर्गी की
दवा है। और जल से अभिमन्त्रित करके रोगी को स्नान करावे ॥१८॥
मन्थ को अभिमंत्रण करके उसे खाने को देवे ॥ सर्वत्र घर के द्वार पर
आगे रोगी को करके और उसे आगे प्रवेश करा कर और स्वयं प्रवेश
कर के तब भात को अभिमंत्रण कर रोगी के लिये खाने को दिया करे ।
जहाँ २ "प्रयच्छति" शब्द से कहा गया है वहाँ २ इसी प्रकार करे ।
"अनु सूर्य०" सूक्त से सूखे चन्दन को अभिमंत्रण करके गोपीतिलका
को जिस किसी में कहती हुई को देखे वहाँ उस रोगी को अभिमंत्रण
करे ॥ २० ॥ वृषभ के लोमों से सोने को लपेट कर धरे और उसे अभि-
मंत्रण कर के रोगी के वास्ते बान्ध देवे ॥ अपस्मार, विस्मय, हृद् रोग,
कामला, रोहिणक रोगों का भेषज्य समाप्त हुआ ॥ २१ ॥ अब श्वेत कुष्ठ
रोग के भेषज्य को कहते हैं। श्वेत कुष्ठ को गोबर से घस कर जब तक
उस में से रुधिर बाहर न हो उसको घसे, रुधिर निकलने पर भृङ्गराज
( भङ्गरिया ), हल्दी, इन्द्र वारुणी, नीलिका और पुष्पा इन पाँचो को