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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

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DevanagariHindipublished361 pages

Page 90 of 361

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Page 90

५८ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
शालायामासजति ॥३१॥ अपरेद्युर्विकृते पिशाचतो रुजति
॥३२॥ उक्तो होमः ॥३३॥ वैश्रवणायाञ्जलिं कृत्वा जप-
न्नाचमयत्यभ्युक्षति ॥३४॥ निश्युल्मुके सङ्कर्षति ॥३५॥
स्वस्त्ययनं कुरुते ॥३६॥ अयं देवानामित्येकविंशत्या दर्भ-
पिञ्जूलीभिर्वलीकैः सार्धमधिशिरोऽवसिञ्चति ॥३७॥१।२५॥
जरायुज इति मेदो मधु सर्पिस्तैलं पाययति ॥ १ ॥
मौञ्जप्रश्नेन शिरस्यपिहितः सव्येन तितउनि पूल्यानि
॥३१॥ दूसरे दिन धरी हुई विकृत होजाने पर पिशाच गृहीत व्यक्ति को
पीड़ा होगी ॥३२॥ इससे जानना कि पिशाच अबही नहीं गया है। तो
पूर्वोक्त वीरणतूलादि उसे उसी भाँति करे जब तक पिशाच न छोड़े
॥३३॥ कुबेरदेव के लिये हाथ जोड़कर मंत्र जपता हुआ आचमन करके
रोगी को जलसे अभ्युक्षण करे ॥३४॥ रात्रि में उल्मुक को अभिमंत्रण
करे परस्पर दो उल्मुकों को घसे ॥३५॥ और रात्रि में स्वस्त्ययन गण के
मंत्रों “अमूपारे पातं न०” इत्यादि सूक्तका पाठ करे ॥३६॥ और “देवानाम्”
इत्यादि मंत्र से २१ (तीन कुशों को एकत्र लपेट कर बान्धने से पिञ्जुली
होती है।) दर्भ पिञ्जुलियों से वलीकों के द्वारा रोगी के शिर
से पैर तक सर्वाङ्ग को अव सेचन करे। जलोदरक रोगी की दवा—घड़े
में दर्भ पिञ्जुली डालकर २१ घर के छप्पर के ओलती के तृणों को
डालकर उस घड़े को अभिमंत्रित कर के तब रोगी को सिंचन कर मार्जन
करे ॥ ॥३७॥१॥२५॥ यह पचीसवीं कण्डिका समाप्त हुई ॥ २५ ॥
अब वात, पित्त, कफ के दवाओं का उपदेश करेंगे ॥ “जरायुज”
इत्यादि सूक्त ( तक्म नाशन गण ) मेद्, मधु, घी, तैल को अभिमंत्रित
करके वात विकार रोगी को मांस और मेद् को पिलावे। और मधुको
अभिमंत्रित करके कफ के रोगी को पिलावे। घृत को अभिमंत्रित करके
वात पित्त के रोगी को पिलावे। और वात, कफ के रोगी को तेल
पिलावे ॥१॥ अब अतिकास, शिर की पीड़ा इन रोगों की दवा का वर्णन
करते हैं ॥ रोगी के शिर में मूँज की पगड़ी पहिना देवे एवं वाम हाथ
से छलनी, लाजा को धारण करता हुआ दहिने हाथ से वपन को लाजा
सहित “जरायुज०” इस सूक्त से लाजा को व्याधि देश तक (जिस स्थान