कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)
Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation
by स्वामी महेश्वरानन्द गिरि
Source: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (origin)
। कौषीतकिब्राह्मणोपनिषत्समाप्ता ।।
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। कौषीतकिब्राह्मणोपनिषत्समाप्ता ।।
जैसे किसी सेठजी के पीछे उसके सेवक जाते हैं वैसे ही (वाणी
आदि) सब आत्मा के पीछे जाते हैं। जिस प्रकार-प्रधान पुरुष अपने
स्वजनों के साथ भोजन करता है वैसे ही यह प्राज्ञ आत्मा इन आत्माओं
के साथ भोजन करता है। तथा लोक धनी का अनुसरण करते हैं वैसे
ही यह इतर आत्मा इस आत्मा का अनुकरण करते हैं। जब तक इन्द्र
को इस आत्मा का ज्ञान नहीं था तब तक वह असुरों से जीता
गया-परन्तु जब उसको इसका ज्ञान हुआ तब उसने असुरों को जीत
लिया तथा उसको समस्त देवताओं में श्रेष्ठता, स्वराज्य और
आधिपत्य की प्राप्ति हुई। वह सम्पूर्ण प्राणियों में श्रेष्ठता, स्वाराज्य
और आधिपत्य को प्राप्त होता है-जो इस प्रकार जानता है, जो इस
प्रकार जानता है।।३३।।
।। इति कौषीतकिब्राह्मणोपनिषत् समाप्ता ।।
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