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कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

Kathasaritsagara Part 2 (Lambaka 6–18)

by महाकवि सोमदेव भट्ट

Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)

DevanagariHindipublished1,079 pages

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अष्टम सम्बर्ग १५१
ये सभी राजकुमार त्रिगुणरथी हैं। सुशर्मा बाहुशाली विशाल क्षोभन और प्रचंड ये
राजपुत्र चतुर्गुण रथी हैं। कुंजरी वीरवर्मा प्रवीरवर सुप्रविज्ञ अमरशाम चन्द्रदत्त काशिक
आदि राजकुमार एवं सिंहभट व्याघ्रभट और शत्रुभट राजा पंचगुण रथी हैं। यह उपवर्मा
नाम का राजकुमार षड्गुण रथी है॥१८-२१॥
राजपुत्र विधाता सुतन्तु, सुगम और नरेन्द्रसखाँ ये सप्तगुण रथी हैं॥२२॥
राजा सहस्रायु का पुत्र महारथी है। यह शतानीक महारथियों के दल का
सरदार है॥२३॥
सूर्यप्रभ के मित्र सुमाप इर्य विमल महाबुद्धि मचल प्रियंकर और दुर्मकर महा
रथियों के नायक हैं॥२४॥
धर्मरुचि और यज्ञरुचि ये दोनों महारथी हैं। इसी प्रकार विश्वरुचि भास और सिद्धार्थ
ये तीनों सूर्यप्रभ के मन्त्री महारथियों के नायक हैं। प्रहस्त और महार्थ ये अतिरथियों के
नायक हैं॥२५ २६॥
प्रज्ञाडप और स्थिरबुद्धि ये रथयूथों के नायक हैं। दानव सुवदमन प्रभंजन धूमकेतु,
प्रवहण वज्रपंजर, कालवक और मङ्कुवेग रथियों और अतिरथियों के नायक हैं। मरुन्मत्त
सिंहनाद ये दोनों रथियों तथा अतिरथियों के सरदार हैं। हे पुत्र महामाय काम्बलिक कालकम्पनक
और दृष्टरोमा ये चारो असुरराज महारथियों के अधिपतिओं के अधिपति हैं ॥२७-३१॥
सूर्यप्रभ के समान शक्तिशाली प्रभास और सुभद का पुत्र धीरपुंधरकुमार ये प्रधान षोडश
महारथियों के नायक हैं। ये तथा अन्यान्य अपनी-अपनी सेनाओं के साथ साथ हुए अनेक योद्धा
हमारी सेना में हैं॥३१ ३२॥