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कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

Kathasaritsagara Part 2 (Lambaka 6–18)

by महाकवि सोमदेव भट्ट

Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)

DevanagariHindipublished1,079 pages

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सप्तम लम्बक २२७
और, अपनी रानियों के साथ उसके बनाये हुए विमानों के द्वारा व्योम-विहार करता
हुआ मानो विद्याधर चक्रवर्ती होने की शिक्षा प्राप्त करने लगा॥२७४॥
इस प्रकार, अपने बन्धु-बान्धवों एवं मित्रों को आनन्दित करता हुआ नरवाहनदत्त
मदनमंचुका और रत्नप्रभा में तीसरी कर्पूरिका के साथ सुख से दिन बिताने लगा॥२७५॥
महाकवि श्रीसोमदेवभट्टविरचित कथासरित्सागर के रत्नप्रभा लम्बक का
नवम तरंग समाप्त
रत्नप्रभा नामक सप्तम लम्बक समाप्त