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कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)

by स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा

DevanagariHindipublished115 pages

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कर्मयोग

रहा हूँ। तुम समझते हो, मैं अच्छा काम कर रहा हूँ। परन्तु याद रक्खो, इस समय वायु-मण्डल में करोड़ों जन्तु मेरी उच्चा-रण-क्रिया से मर रहे होंगे। इस प्रकार मैं साथ साथ बुराई भी करता जा रहा हूँ। अतः मनुष्य का कोई काम ऐसा नहीं है जिसको हम बिलकुल अच्छा या बिलकुल ही बुरा कह सकें। जिस काम का प्रभाव हम पर अच्छा पड़ रहा है, उसको हम अच्छा कहते हैं। तुम मेरी वक्तृता को इसलिए अच्छा समझते हो कि तुम पर उसका प्रभाव अच्छा पड़ रहा है। किन्तु वायुमण्डल के सूक्ष्म जन्तु ऐसा न समझेंगे। इन जन्तुओं को तुम नहीं देखते, तुम केवल अपने आस पास के मनुष्यों को देख रहे हो। मेरे भाषण का जो तुम पर प्रभाव पड़ रहा है, उसको तुम अनुभव कर रहे हो। परन्तु वायु-मण्डल के सूक्ष्म जन्तुओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसको तुम नहीं जानते। इसी प्रकार यदि हम अपने बुरे कामों की पड़ताल करें तो हमको मालूम होगा कि उससे कहीं अच्छे परि-णाम भी उत्पन्न होते होंगे। वह मनुष्य जो भलाई में मिली हुई बुराई को देखता है और बुराई में मिश्रित भलाई को भी देखने की योग्यता रखता है, वास्तव में बुद्धिमान् और कर्मयोग के रहस्य को जाननेवाला है।

इस सिद्धान्त का परिणाम यह है कि हम चाहे कितनी ही चेष्टा करें, कोई काम ऐसा नहीं कर सकते जो बिलकुल ही अच्छा या बुरा हो और न कोई ऐसा कर्म हो सकता है जो साथ साथ सुख-दुःख देनेवाला न हो। हम दूसरों को बिना कष्ट पहुँचाये न जी सकते हैं, न श्वास ले सकते हैं। हमारे भोजन का प्रत्येक