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कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)

by स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा

DevanagariHindipublished115 pages

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कर्मयोग

तुमने सुना होगा, बहुत से मनुष्य एक विशेष प्रकार के फूल के विषय में विचित्र विश्वास रखते हैं। इसका नाम अँगरेज़ी में मेफ़्लावर है। वे कहते हैं, पहले वे पवित्र और धर्मात्मा थे, फिर बिगड़ गये और दूसरों को पीड़ा देने लगे ! संसार में सर्वत्र यह दशा है। जो लोग मनुष्यों को सताना पाप समझते हैं, वही समय पर अत्यन्त निर्दय और हिंसक बन जाते हैं। मैंने दो प्रकार की लड़ाइयों का वर्णन सुना है। एक सेना की लड़ाई और दूसरी मेफ़्लावर की। अमेरिकावासी कहते हैं कि वे मेफ़्लावर से आये हैं। यह कट्टरपन का एक उदाहरण है। समय आवेगा, जब डाक्टर ( वैद्य ) लोग बता सकेंगे कि कट्टरपन भी एक रोग है। मैंने इस रोग के रोगी सैकड़ों ही देखे हैं। ईश्वर कट्टरपन से सब को बचावे।

क्या तुम्हारी समझ में जो शराब के विरुद्ध युद्ध करते हैं, वे ग़रीबों की सहायता करते हैं ? नहीं, प्रत्येक कट्टर मनुष्य अपने काम का बदला चाहता है। जहाँ लड़ाई हुई, उनको लूट के माल की आशा होती है। तुम इन कट्टर मनुष्यों की गोष्ठी से बाहर निकल आओ। तुम्हें इनके वास्तविक प्रेम और सहानुभूति का हाल मालूम हो जायगा। उस समय तुम शराबी के साथ सहानुभूति करोगे और समझोगे कि शराबी भी आख़िर तुम्हारी तरह मनुष्य है। न मालूम किन कारणों से वह शराब पीने लगा है। सम्भव है कि उन्हीं कारणों की उपस्थिति में तुमको आत्मघात कर लेना पड़ता। मुझको याद है कि अमेरिका की एक स्त्री ने मुझसे शिकायत की कि उसका पति शराब पीता है। मैं समझता हूँ कि