कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariHindipublished259 pages
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द्वादश अध्याय ] [ ४५३
प्रति कहा है ।२६। इसके सुनने से ही सब पाप नष्ट हो जाते हैं, मन मे
हरि-भक्ति की वृद्धि होती और इन्द्रियो के अधिष्ठाता देवता भी सुखी
होते है । काम और रागादि सभी दोष तथा माया-मोह का नाश होता
है ।२७। तीनो लोको के ज्ञाता मुनियो ने वेद पुराणादि शास्त्रो के अमृत
रूपी सार का मजन करके यह अत्यन्त पवित्र एव मगल रूप श्रीकृष्ण
भक्ति को प्राप्त किया है । यह भव-बन्धन को नष्ट करने वाली है ।
उन मुनियो को इस प्रकार का फल पाते देख कर उनको भगवान
श्रीकृष्ण के समान ही माना गया है ।२८।