कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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भगवान् के साथ द्वैरथ युद्ध मे तत्पर हो रहा हूँ। सभी लोक इसका
अवलोकन करें। ४-५। मैं आप विभु पर प्रहार करूँगा। परन्तु प्रहार
करते समय भी यदि मैं आपको ब्रह्म से भिन्न समझने लगूँ तो शिव
और विष्णु मे भेद जानने वाले को जिस लोक की प्राप्ति होती है, मुझे
उसी लोक की प्राप्ति हो ।६।
इति राज्ञो वच श्रुत्वा अक्रोध. क्रुद्धवद्दिभुः ।
बाणैस्ताडयतस्तस्य धृतायुधमरिन्दमम् ॥७॥
शशिध्वजरतत्प्रहारमगणय्य वरायुधैः ।
तं जघ्ने बाणवर्षेण धाराभिरिव पर्वतम् ॥८॥
तद्बाणवर्षभिन्नान्तः कल्क परमकोपनः ।
दिव्यै शस्त्रास्त्रसघातैस्तयोर्युद्धमवर्त्तत ॥६॥
ब्रह्मास्त्रस्य च ब्रह्मास्त्रं वायव्यस्य च पार्वतै. ।
आग्नेयस्य च पार्जन्यै. पन्नगस्य च गारुडै ॥१०॥
एव नानाविधैरस्त्रै रन्योन्यमभिजघ्नतुः ।
लोका; सपाला सत्रस्ता युगान्तमिव मेनिरे ॥११॥
देवा बाणाग्निसत्रस्ता अगमन्खगमाः किल ।
ततोऽतिवितथोद्योगो वासुदेवशशिध्वजौ ॥१२॥
निरस्त्रौ बाहुयुद्धेन युयुधाते परस्परम् ।
पदाघातैस्तलाघातैर्मुष्टिप्रहर णैस्तथा ॥१३॥
राजा के इन वचनो को सुन कर क्रोध से परे कल्किजी क्रोधित
हो उठे । यह देख कर आयुधधारी एव अरिमर्दन राजा शशिध्वज न
उन पर बाण-प्रहार प्रारम्भ किया ।७। जब राजा ने अपने उस प्रहार
को निष्फल हुआ देखा तो वह पर्वत पर वर्षणशील मेघ के समान घोर
बाणो की वर्षा करने लगे ।८। उस बाण-वर्षा से कल्किजी का शरीर
आहत हो गया । तब वे अत्यन्त क्रोध करके आगे बढे । इस प्रकार
दोनो मे घोर युद्ध होने लगा ।६। ब्रह्मास्त्र के द्वारा ब्रह्मास्त्र काटने लगे ।
पार्वतास्त्र से वायव्यास्त्र, मेघास्त्र से आग्नेयास्त्र और गारुडास्त्र से