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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

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DevanagariHindipublished259 pages

Page 170 of 259

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Page 170

यहाँ पृष्ठ का सम्पूर्ण पाठ पंक्ति-दर-पंक्ति प्रस्तुत है:

अष्टम अध्याय ] [ ४२३
अतिरिक्त अन्य कोई गति नही ।१५। सुशान्ता के यह विनम्र वचन
सुन कर राजा के नेत्रो मे हर्षाश्रु छा गये और वे अपने को परम
वैष्णव मानते हुए भगवान् विष्णु का स्मरण करने लगे ।१६। उन्होने
अपनी प्रिय पत्नी को हृदय से लगो लिया और फिर अपने वीर वैष्णव
सैनिको के सहित विष्णु नाम का स्मरण करते हुए रण भूमि के लिये
चल दिये ।१७। उन्होने कलिक-सेना मे प्रविष्ट होकर उनकी विशाल-
सेना को द्रवित कर दिया । उस समय महाबली शय्या कर्णगण आयुधो
से सुसज्जित हुए उनसे युद्ध मे तत्पर हुए ।१८।
शशिध्वजसुतः श्रीमान्सूर्यकेतुर्महाबल ।
मरुभूपेन युयुधे वैष्णवो धन्विनां वरः ।१९।
तस्यानुजो वृहत्केतुः कान्तः कोकिलनिस्वनः ।
देवापिना स युयुधे गदायुद्ध विशारदः ।२०।
विशाखयूपस्तुभूपस्तु शशिध्वजनृपेण च ।
रुधिराश्वो धनुर्धारी लघुहस्त प्रतापवान् ।
रजस्यनेन युयुधे भर्ग्य शान्तेन धन्विना ।२२।
शूलै प्रासैर्गदाघातैर्बाणशक्त्यष्टितोमरै ।
भल्लै खड्गैर्भुशुण्डीभि कुन्तै समभवद्रणः ।२३।
पताकाभिर्ध्वजैश्चिष्टमैस्तोमरैश्छत्रचामरै
प्रौद्धूतधूलिपटलैरन्धकारो महानभूत ।२४।
मह बली, धनुर्धारी एव परम वैष्णव राज-पुत्र सूर्य केतु राजा
मरु से युद्ध करने लगा ।१९। सूर्यकेतु का छोटा भाई बृहत्केतु कोकिल
के समान मधुरवाणी वाला और अत्यन्त कमनीय होते हुए भी गदा
युद्ध मे पार गत था, वह राजा देवापि के साथ संग्राम मे तत्पर हुआ
।२०। हाथियो से सम्पन्न और विविध प्रकार के शस्त्रास्त्रो से सुसज्जित
विशाखयूप-नरेश राजा शशिध्वज से युद्ध करने लगे ।२१। लाल अश्व
पर आरोहण किये हुए हस्त लाघव सम्पन्न धनुर्धारी एवं प्रतापी भर्ग्य
धूलिमयो पृथिवी पर धनुर्धारी शान्त से युद्ध मे भिड गया ।२२। इस