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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariHindipublished259 pages

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सप्तम अध्याय-३ ] [ ४१५
से अन्य वर्ष मे पलायन कर गया ।१०। अपने दिव्यास्त्रो के तेज से
राजा मरु ने भी शक और कम्बोजो का सहार कर दिया तथा राजा
देवापि ने चोल और बर्वरो को मृत्यु के घाट उतार दिया ।११। महा-
बली विशाखयूप नरेश ने अपने दिव्य शस्त्रास्त्रो के द्वारा पुलिन्द और
युक्कसो को नष्ट किया ।१२।
जघानविमलप्रज्ञ खड्गपातेन भूरिणा ।
नानास्त्रशस्त्रवर्षैस्ते योधा नेशुरनेकधा ।१३।
कल्कि कोकविकोकाभ्या गदापाणियुंधा पतिः ।
युयुधे विन्याराविज्ञो लोकाना जनयन्भयम् ।१४।
वृकासुरस्य पुत्रौ तौ नप्तारौ शकु नेर्हरेः ।
तयो. कल्कि स युयुधे मधुकैटभयोर्यथा ।१५।
तयोर्गंदा प्रहारेण चूर्णितागस्त तत्पते ।
कराच्च्युतापतद्भूभौ दृष्ट्वोचुर्विस्मयितो जना ।१६।
ततः पुन क्रुधा विष्णुर्र्जगालिष्णुरुर्महाभुज ।
भल्लकेन शिरस्तस्य विकोकस्याच्छिनत्प्रभु ।१७।
मृतो विकोकः कोकस्य दर्शनादुत्थितो बली ।
तद्दृष्ट्वा विस्मिता देवा, कल्किश्च परवीरहा ।१८।
उन श्रेष्ठ बुद्धि वाले विशाखयूप-नरेश ने निरन्तर अपने खड्ग
एव अनेकानेक शस्त्रास्त्रो के द्वारा शत्रुओ को विनष्ट किया । इस प्रकार
पर-पक्ष के बहुत सारे वीर मृत्यु को प्राप्त हुए ।१३। गदा-कुशल कल्कि
जी गदा लिये हुए ही कोक विकोक से सग्राम कर रहे थे, जिससे सब
लोक भयभीत हो रहे थे ।१४।
वे दोनो भाई शकुनि के पौत्र और वृकासुर के पुत्र थे । पुरा-
काल में जैसे विष्णु का मधु कैटभ से युद्ध हुआ था, वैसे ही इन दोनो
के साथ कल्कि जी घोर सग्राम कर रहे थे ।१५। तभी कोक-विकोक
के गदाघात से कल्किजी का देह चूर्ण जैसा हो गया । उनके हाथ
से गदा छूट गई । यह दृश्य सभी उपस्थित व्यक्ति आश्चर्य पूर्वक देख