Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 426 of 442

Read in context
Page 426

४३० ६०३ श्रीकालिका पुराण ६०३
रहा करता है । हे द्विजोत्तमोँ! यह सम्पूर्ण विश्व गौओं के ही अधीन रहा
करता है । वे सब गौएँ बेताल के वंश में ही होने वाली हैं और सदा
सबकी प्रिय होती हैं । जो महात्मा बेताल के इस चरित्र का नित्य श्रवण
किया करता है और इनके वंशों से जन्म को सुनता है वह सब सुखी
और बलवान् हुआ करता है । उस पुरुष की न तो गौयें नष्ट होती हैं
और न कभी वैभव ही विनष्ट हुआ करता है । उस पुरुष की न तो गौयें
नष्ट होती हैं और न कभी वैभव ही विनष्ट हुआ करते हैं । उस पुरुष
को भूत पिशाच आदि भी कभी नहीं देखा करते हैं । बेताल स्वयं ही
उनकी निरन्तर रक्षा किया करता है । हे विप्रो! यह मैंने आपको बता
दिया है जिस तरह से बेताल और भैरव! दोनों ने जन्म लिया था और
पुत्रों को जन्म ग्रहण कराया था । अब तो आपके सभी संशय विच्छन्न
हो गये होंगे । जिस तरह से कालिका देवी ने शंकर को मोहित किया
था और जैसे शरीर के अर्ध में उत्पन्न हुई थी और भगवान् शुम्भ ने
जैसे-जैसे किया था, यह सब कह दिया है । जो मनुष्य कालिका के
लिए आपको नमस्कार है, ऐसा स्वयं कहता है उस पुरुष के हाथ में
ही मुक्ति तो स्थित रहा करती है और तीनों का अर्थात् धर्म, अर्थ काम
का वर्ग मुक्ति के ही वश में रहने वाला इनका अनुगामी हुआ करता है ।
इस रीति से परम पुण्यमय कालिका नाम वाला पुराण आपको
वर्णित करके सुना दिया है । जो मन्त्रों से परिपूर्ण हैं, शुद्ध ज्ञान को देने
वाला, कामनाओं का दाता परम श्रेष्ठ है । हे द्विजगणों! यह लोक में
और वेदों में भी परम गोपनीय है । इसके लिए देवगन्धर्व और सिद्ध
आदि सभी सदा स्पृहा किया करते हैं । इस पर उत्तम कालिका नामक
पुराणामृत को महात्मा वसिष्ठ ने मुझसे ही सुना था और अध्ययन
किया था । यह कामरूप सुरालय में भी इसी कारण से गुप्त है ।
हे महर्षिगणों! उसको इस समय में प्रकट करके ही भली भाँति
आख्यात किया है । आप लोग भी इसको नहीं देवें यह सर्वदा लोकों
में गोपन करने योग्य है । जो शठ हो, चञ्चल चित्त वाला हो, नास्तिक
हो, अविजित आत्मा वाला हो, भक्ति और श्रद्धा से रहित हो उसको