कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context३३८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
पर, हे वत्स! शुक्ल पक्ष की नन्दिका अर्थात् प्रतिपदा तिथि से आरम्भ
करके रहे । अयाचित का अशन करने वाला, रात्रि में एक बार भोजन
करने वाला, अमद रहने वाला, प्रातःकाल में स्नान करने वाला,
शीतोष्ण आदि द्वन्दों का सहन करने वाला और दोनों वक्त में शिव का
पूजन करने वाला, जप और होम से समायुक्त होता है ।
विल्व वृक्ष की शाखाओं में बेध न करे और षष्ठी तिथि में देवी
पूजन फलों से करे । सप्तमी तिथि में उस विल्व की शाखा का आहरण
करके प्रति पूजन करना चाहिए । फिर अष्टमी में विशेष रूप से पूजा
का समाचरण करना चाहिए । स्वयं जागरण करे तथा महानिशा में
बलिदान करे । अधिक बलिदान तो विधि के सहित नवमी में करना
चाहिए । दश भुजाओं वाली देवी का ध्यान कर और दुर्गा तन्त्र से पूजा
करनी चाहिए । उस तिथि में रात्रि में विसर्जन करके समाचरण करे ।
जिस समय में सोलह भुजाओं वाली महामाया का पूजन करे, दुर्गा तन्त्र
से करे । उसकी विशेषता के विषय में अब श्रवण करो । कन्या राशि
की संक्रान्ति में कृष्ण पक्ष की एकादशी के उपवास किए हुए द्वादशी
में एक बार दूसरे दिन में करे । चतुर्दशी में विधान में महामाया का
बोधन करे जो गीत, वाद्य और निर्दोष के द्वारा और अनेक नैवेद्यों के
द्वारा वाधन करना चाहिए ।
बुद्ध पुरुष को दूसरे दिन में अयाचित उपवास करे । इस प्रकार
ही जब नवमी हो व्रत करे । ज्येष्ठा में भली भाँति अभ्यर्चन करना
चाहिए और मूल में प्रति पूजन करे । उत्तरा से अर्चन करके श्रवण के
अन्त में विसर्जन करना चाहिए । जिस समय में अठारह भुजाओं वाली
महामाया का पूजन करे । हे भैरव! दुर्गा मन्त्र के द्वारा वहाँ पर भी करे ।
हे भैरव! उसका आप श्रवण कीजिए । कन्या में कृष्ण पक्ष की आद्रा
नक्षत्र के दिन पूजन करे । नवमी तिथि में गीत वादित निर्घोषों के द्वारा
देवी का बोधन करे । शुक्ल पक्ष में चतुर्थी तिथि में देवी के केशों का
विमोचन करे । पञ्चमी में प्रातःकाल ही में शुभ जल से स्नपन करावे ।
सप्तमी में पत्रिका की पूजा करे और अष्टमी में भी उपोषण करे ।