Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 313 of 442

Read in context
Page 313

३५६ ॥ श्रीकालिका पुराण ॥
सभी वर्णों की मात्रा देवियाँ ही मातृका हैं। वे शिवदूती प्रभृति है।
तनु में स्थित उसके न्यास हैं। ये उन न्यूनताओं की पूर्ति किया करते
हैं तथा शीघ्र ही चतुर्वर्ग को देती हैं और सुतों के पूजन में सदा ही रक्ष
किया करती हैं। सर्वदा मातृका का न्यास करना धर्म, अर्थ, काम मोक्ष
के चार वर्गों का प्रदान करने वाला होता है और सभी कामनाओं को
देने वाला है तथा यह तुष्टि और पुष्टि कर भी देने वाला होता है। जो
मनुष्य सुरों के पूजन के बिना भी मातृका का न्यास किया करता है
उससे चारों प्रकार का भूतों का समूह निरन्तर भयभीत रहा करता है।
उस महान् ओज वाले पुरुष के दर्शन करने के लिए देवगण भी स्पृहा
किया करते हैं। उसमें ऐसी विलक्षण शक्ति समुत्पन्न हो जाती है कि
वह सबको अपने वश में कर लिया करता है और स्वयं कभी भी
पराभव को प्राप्त नहीं होता है।
साधक को चाहिए कि कुसुम को विष्णु के मन्त्र के द्वारा अंगुलि
के अग्र भाग से विमर्दन के लिए ग्रहण करे और इसका ग्रहण कर
शोधन के कर्म में करना चाहिए। उस कुसुम को ग्रहण करके हाथों
से मर्दन करना चाहिए। उपान्त सामिचन्द्र से राजित, शून्य से संयुत,
रुद्रान्तोपरि संसृष्ट यह मन्त्र वैष्णव मन्त्र माना गया है। प्रासाद मन्त्र के
द्वारा साधक अंगुलि के अग्र भाग से ग्रहण करके करों से पुष्प मर्दन
करे। काम बीज के द्वारा निमन्थन करे ब्राह्मण के द्वारा अवघ्राण करे।
ऐशानी दिशा में विशेष रूप से प्रसाद के द्वारा परित्याग करना चाहिए।
ऐसा करने पर करों की अनुपम विशुद्धि होती है। जलों का, गूढ़पाद
आदि के स्पर्श से विशोधन करने से विशुद्धि हुआ करती है। जो हाथों
में दुर्गन्धि एवं उच्छिष्ट के संस्पर्श से दूषण होता है। वह सब अज्ञान
रूप वाला है उसका सुन्दर विधान से विनाश कर देता है। पुष्पों के
ग्रहण करने से अंगुलियों के अग्रभाग शुद्ध हो जाते हैं और करों के
दोनों तले पुष्पों के मर्दन से विशुद्धि को प्राप्त होते हैं। सभी तीर्थ
नासिका में और कर के प्रति समापात होते हैं। हे भैरव! इस कारण
से ये कार्य यत्नों के साथ करने चाहिए।