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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 283

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २८५
है। हे महामुने! वह हमारे ऊपर अपनी पृथ्वी में प्रसन्नता को प्राप्त होंगे,
यही हमको आप बतलाइए। हे मुनि शार्दूल! जिस रीति से हम
आराधना करें, जो तन्त्र है और जैसा भी क्रम है, वह सभी आप उत्तम
रूप में बताने के लिए योग्य होते हैं। जिस रीति से शीघ्र ही हर को
प्राप्त कर लेवें। हे मुनिश्रेष्ठ! आप अनुशासन कीजिए। हम दोनों
आपके प्रणत हैं।
वशिष्ठ जी ने कहा-आप दोनों के ऊपर भगवान् वृषकेतु उमादेवी
के सहित प्रसन्न हैं। यहाँ पर स्वयं शीघ्र प्रसाद को प्राप्त हो जायेंगे।
समस्त देवगणों के साथ अपनी भार्या के साथ वृषभध्वज गृह से अपने
पुत्रों का पालन करते हुए आकाश के मार्ग द्वारा समाक्षिप्त हैं। किन्तु
आपके मनुष्य के देह का अधिवासन करके अर्थात् तपों व्रतों से संस्कार
करके स्वयं ही कैलाश पर ले जायेंगे और गणपत्य दोनों का नियोजन
करेंगे और मैं भी उपदेश कर दूँगा। जिससे आप दोनों ही शीघ्र ही भर्ग
को प्राप्त कर लेंगे। हे पार्वती पुत्रों! उसे एकाग्रमन से श्रवण कीजिए।
वे ध्यान से चिरकाल में प्रसन्न होते हैं और शीघ्र ध्यान पूजन से प्रसन्न
होते हैं। इस कारण से आज तात्त्विक रूप से ध्यान और पूजन
बतलाता हूँ। वे तेज से परिपूर्ण हैं, सदा शुद्ध स्वरूप हैं, ज्ञानामृत से
विवर्धित हैं, जगत् से परिपूर्ण, चित् (ज्ञान) और आनन्दरूप हैं, शौरि
और ब्रह्मा के सदा महान् योग से संयुत हैं, ये सम्पूर्ण जगत् उनके ही
स्वरूप हैं। उनका कथन करने में कौन समर्थ है। किन्तु जिन रूपों से
ये भगवान् शंकर विचरण किया करते हैं उनमें से जो मेरे ज्ञान के द्वारा
गम्य है उसमें जो भी अभीष्ट है आप दोनों को मैं कहता हूँ।
हे नरश्रेष्ठ! सबसे प्रथम मन्त्र का श्रवण करो उसके पश्चात् ध्यान
से साक्षात्कार को सुनिए। इसके पश्चात् पूजा का क्रम फिर क्रम से
व्रत को सुनिए। समस्त स्वरों में दीर्घ शेष होता है-इस रीति से पाँच
मन्त्र कीर्तित किए गए हैं। एक-एक से वहाँ पर एक-एक वक्त्र तो देव
का पूजन करना चाहिए अथवा एक को समुदित करके पाँचों से पूजन
करें। इसके अनन्तर प्रसाद के द्वारा पंचवक्त्र देव का यजन करना