कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context४००३ श्रीकालिका पुराण ४००४ २९
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आप त्रयीमयी अर्थात् वेदों से परिपूर्ण हैं तथा आप त्रिमाता हैं, आप
सब भूतों के स्वरूप वाली हैं। जो पितृगणों के रञ्जन करने से सामवेद
की उद्गीति है वह आप ही हैं। सब यज्ञों की देवी आप हैं तथा आप
सामिधेनी और हवि हैं। जो परमात्मा को अव्यक्त, अनिर्देश्य, निष्कल
रूप हैं तथा तन्मात्र, सफल और जगन्मय हैं, वह आप ही हैं। जो मूर्ति
वितता सर्वधारित्री और क्षिति का धारण करती हुई है। हे विश्वाम्भरे !
लोक में सदा शक्ति और भूति को प्रदान करने वाली आप ही हैं। आप
लक्ष्मी-चेतना, कान्ति और सनातनी पुष्टि हैं। आप कालरात्रि हैं, आप
मुक्ति हैं, आप शान्ति-प्रज्ञा और स्मृति हैं। हे सुख और मोक्ष के प्रदान
करने वाली ! आप इस संसाररूपी महान् सागर से पार करने के लिए
तारणी अर्थात् नौका स्वरूप हैं। आप प्रसन्न होइए ! आप समस्त जगतों
की गति एवं मति हैं जो सदा ही रहा करती हैं। आप नित्या हैं और
आप चराचर को मोहित करने वाली अनित्या भी हैं। आप सब योगों
के साङ्गोपांग विभावन करने वाली सन्धिनी हैं। आप यतियों की चिन्ता
और कीर्ति हैं और आप ही उनके आठ अंगों से समन्वित हैं। आप
सर्गिणी, शूलिनी, चक्रिणी और घोर रूप वाली हैं। आप समस्त जनों
की ईश्वरी हैं, आप सब पर अनुग्रह करने वाली हैं। आप इस विश्व
की आदि हैं, आप अनादि हैं अर्थात् आप ऐसी हैं जिसका कोई आदि
है ही नहीं। आप इस विश्व की योनि हैं अर्थात् विश्व के उत्पन्न करने
वाली हैं और आप स्वयं अयोनिजा हैं अर्थात् आपके समुत्पन्न करने
वाला कोई नहीं है। आप अनन्ता हैं अर्थात् ऐसी हैं जिनका कोई अन्त
ही नहीं है। आप सब जगतों की एकान्तकारिणी हैं अर्थात् समाप्त
जगतों की रचना करने वाली हैं। आप नितान्त निर्मला हैं और आपको
तामसी कहकर गाया जाता है। आप हिंसा और अहिंसा हैं तथा आप
चार मुखों से संयुत काली हैं।
आप सबसे परा जननी हैं तथा आप दामिनी हैं। आप ही में यह
विश्व लय होता है। आप तत्व स्वरूपा हैं तथा सबको विभरण किया
करती हैं। आप सृष्टि से हीन हैं, आप सृष्टि हैं। आप कण रहित होती