Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 268 of 442

Read in context
Page 268

२७० श्रीकालिका पुराण
उसके द्वारा ईश्वर को अपना पति चाहा था। यह तो विधाता का ही
नियोजन है। इसको अन्यथा करने में कौन समर्थ हो सकता है अर्थात्
इसके विरुद्ध करने की शक्ति किसी में भी नहीं। बिना शम्भु के अन्य
कौन है जो मेरी पुत्री की प्रार्थना करने में समर्थ हो। जिसको हर ने
ग्रहण कर लिया है उसका ग्रहण करने का अन्य कौन उत्साह करेगा।
और वह काली भी अपने मन से मन्त्र को ग्रहण कर अन्य किसी की
इच्छा ही नहीं कर रही हैं।
इतना कहकर मेनका के साथ शम्भु के लिए अपनी पुत्री को देने
के लिए अंगीकार करके उनको विदा किया गया था और फिर वे
महेश्वर के समीप में पहुँचे। उस सब मुनियों ने जिनमें मरीचि प्रधान
थे, हे द्विजो! वहाँ से गमन किया था।
जो कुछ भी शैलराज ने कहा था उन्होंने भगवान् शंकर से कह
दिया था। हे हर! शैलराज तो अपनी कन्या को आपके लिए प्रदान
करने को समुत्साहित हो रहा है। इस समय जो कुछ आप करना
समुचित समझते हैं, वही आपको करना चाहिए। हे हर! अब हम
लोगों को अपने आश्रम गमन करने की आज्ञा दीजिए। भगवान् हर ने
साधन करने के योग्य कार्य सिद्धि समझ करके उन सब मुनियों को
विदाई दे दी थी। एक-एक मुनि यथोचित रूप से सम्भाषण करके ही
क्रम से विदा किया था। काली के साथ जब विवाह हो उस अवसर
पर आप मेरे समीप में आइये। इस प्रकार से भगवान् हर के कहे हुए
वचन की प्रतीक्षा करके ऋषिगण वहाँ से अपने आश्रमों को चले गये थे।
माघ मास में-शुक्ल पक्ष में पञ्चमी तिथि और गुरुवार के दिन में
उतरा फाल्गुनी नक्षत्र में भरणी आदि में रवि के स्थित होने पर वहाँ पर
मुनिगण जिनमें मरीचि प्रधान थे वहाँ पर समागत हुए और ब्रह्मा आदि
देवगण भी आ गये थे। उसी भाँति सब दिक्पाल मुनिगण शक्ति के
सहित इन्द्र देव, ब्रह्माणी आदि मातायें, ब्रह्माणी के पुत्र देवर्षि नारदजी
भी वहाँ पर गये थे। इन परिचरों के साथ आप अपने गणों के द्वारा
आप्यायित भगवान् शम्भु ने विवाह सम्बन्धी विधि के साथ गिरिवर की