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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 230

किए हुए थे। श्रीकृष्ण और इन्द्र क्षण भर में ही आकाश में अदृश्य
हो गये थे।
फिर क्षण भर में ही जगत् के स्वामी गरुड़ द्वारा नरक से वशीकृत
परम रम्य प्राग्ज्योतिष पुर में पहुँच गये। वह दुर्ग छह सहस्त्र भयंकर
रौरव पाशों से और क्षुरान्तों से वेष्टित था और पार्श्व में मृत्यु पाशों के
समान उच्छ्रिट था। उन्होंने उस पुर से उसी समय में निकलते हुए नारद
को देखा था। वह देव मुनि श्रीमान् जब नरक के प्रति गये थे उस नारद
को देखा था। वह देव मुनि श्रीमान् जब नरक के प्रति गये थे उस समय
प्राग्ज्योतिष में गमन करके वे नारद मुनि उसके द्वारा सत्कार को प्राप्त
हुए थे। उन्होंने नरक से योषितों के साथ संगम करने में उस समय कह
दिया। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी है। हे धरापुत्र! नवमी
तिथि में तुम महान् आपदाओं को प्राप्त करते हो। उस समय में चतुर्दशी
में यदि ये योषितें सुस्नात हों उसी समय में तुमको सुखपूर्वक सुरतों में
प्रयुक्त करनी चाहिए। देवर्षि नारद जी के इस वचन का श्रवण करके
नरक भय से मोहित हो गया था। उसने आसार और प्रसार नगर में
निवेदित कर दिया था।
भौम (नरक) ने राक्षसों से सुरक्षित नगर को सभी ओर से राज्य
को सुरक्षित कर दिया था। उस अवसर में भगवान् पश्चिम द्वार पर
प्राप्त हुए थे। छःसहस्त्र पाशों के क्षुरों को अनेक प्रकार से भली भाँति
छेदन करके उन्होंने गणों के साथ और बान्धवों सहित मुरु दैत्य का
हनन कर दिया था। जो छः सहस्त्र महान् वीर दानव द्वार पर संस्थित
थे। मुरु को मार कर दूसरे जो छःसहस्त्र उसके पुत्र थे उस समय उनको
चक्र से मार गिराया था और अन्य दानवों को भी खण्ड-खण्ड कर
दिया था। इसके उपरान्त वहाँ पर अनेक जो शिलाओं के संघ थे उन
सबका अतिक्रमण करके भगवान् जनार्दन ने गणों के सहित और
अनुचरों से संयुक्त निसुन्द को मार गिराया था। जिसने अकेले सहस्त्र
वर्ष तक देवों से युद्ध किया था और महान् पराक्रम वाला वीर था
उसने इन्द्र पर आक्रमण किया था।