Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 212 of 442

Read in context
Page 212

२१४ श्रीकालिका पुराणे
के द्वारा द्वादश वर्ष पर्यन्त महायज्ञ करने का समाचरण किया था। हे
द्विजोत्तमो! वहाँ पर ही तीनों अग्नियों में बारम्बार हवन किये जाने पर
और उस समय में द्विज के द्वारा यज्ञ स्वरूप वाले वाराह के अभ्यर्चन
किए जाने पर उस यज्ञ से ही चार प्रकार की प्रजा पुत्रियाँ समुत्पन्न हुईं
थीं जो रूप लावण्य से सुसम्पन्न थीं और सृष्टि के रचना करने के लिए
अमित प्रजावली थीं। दक्ष ने उन तेरह पुत्रियों को महान् आत्मा वाले
कश्यप मुनि के लिए प्रदान कर दिया था। उससे बहुत-सी सन्ततियाँ
समुद्भूत हुई थीं जिनसे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त हो गया था।
उन समस्त प्रजाओं को कश्यप मुनि ही जन्म प्रदान करने वाले
अर्थात् जनक हुए थे। हे द्विज शार्दूलो! यह निश्चित है कि कश्यप मुनि
ने ही यह सम्पूर्ण जगत समुत्पन्न हुआ था। उनके नाम और उनसे
समुत्पन्न होकर पृथक्-पृथक् सब प्रजाओं की आप समस्त मुनिगण
सब अब श्रवण कीजिए जिनको मैं भली-भाँति कह रहा हूँ, मुझसे ही
आप उनका ज्ञान प्राप्त करिए। अब उन तेरह कन्याओं के नामों को
बतलाया जाता है-अदिति, दिति, काला, दतायु, सिंहिका, मुनि,
क्रोध, प्रथा, वरिष्ठा, विनता, कपिला और कद्रू ये दक्ष प्रजापति की
तेरह पुत्रियाँ कीर्त्तित की गयी थीं। ध्यान करने वाले विधाता के दक्षिण
अंगुष्ठा से मुन से यह सम्पन्न हुआ था इसी कारण से देवों और मनुष्यों
में यह दक्ष इस नाम से कहा जाता है। ब्रह्माजी के मानस अर्थात् मन
से उत्पन्न हुए दश पुत्र पूर्व में वर्णित किए गये हैं। उनमें छः सृष्टि
रचना करने वाले हुए थे। उनके नाम ये हैं-मरीचि, अत्रि, अंगिरा,
पुलस्त्य, पुलय, क्रतु। मरीचि का पुत्र लोकमानव कश्यप उत्पन्न हुआ
था। इसकी ही दक्ष की कन्याओं से बहुत-सी प्रजा उत्पन्न हुई थी।
इसकी जाया से समुत्पन्न हुई प्रजाओं के अब आप नामों का ज्ञान प्राप्त
कर लो।
धाता, मित्र, अर्यमा, शक्र, वरुण, सोम, भर्ग, विवस्वान्, पूषा,
सविता, त्वष्टा, विष्णु हुए। अदिति के ये द्वादश सुत हुए थे। जो
आदित्य इस नाम से कीर्तित हुए थे इनमें जो कनियान् अर्थात् छोटा था