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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished2,136 pages

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( १२० )

सुलतानबोध

वार्ता १३

एक बार लोगोंने हजरत इब्राहीम अख्दमसे कहा कि अमुक सन्त बड़ा सिद्ध और ईश्वरतक पहुँचा हुआ है। वह सदा ध्यान में ही रहता है और दूर दूर देशकी बातोंको कह देता है। और सदा तपस्या में ही रहता है। आपने उन लोगोंसे कहा कि, मुझे उसके पास लेचलो मैं उसका दर्शन करूँगा। लोग आपको उसके पास ले गये। आपने वहाँ जाकर देखा कि, वह उससे भी बढकर सिद्धिवाला है। उस सिद्धिने आपसे प्रार्थना की कि; आप तीन दिन तक यहाँ रहिये आप रह गये। उसके व्यवहारको देखकर आपने विचार किया तो मालूम हुआ कि, उसका भोजन आदि निर्वाह दम्भकी कमाईसे चलता है। तब आपको उसकी दशा पर दया आयी। तीन दिनके बाद आपने उस सिद्ध को नेवता देकर अपने कुटी पर बुलाया जब वह आप के पास आया तब दूसरे ही दिन उसकी सिद्धि लुप्त होने लगी तीसरे दिन तो वह कोरा सन्त रह गया। तब उसको बड़ा आश्चर्य हुआ उसने आपसे कहा कि आपने मेरे ऊपर क्या कर दिया मेरा सब चमत्कार जाता रहा ? आपने उसको उत्तर दिया कि; पहले तुम हरामकी कमाईसे अपना पेट भरते थे इस कारण कालने तुम्हारे हृदयमें प्रवेश करके तुम्हें अनेक प्रकारकी सिद्धिका लालच दिखाकर साहब के देशसे काल देशमें लेगया था। अब तुम तीन दिनसे सुकृति की कमाई का भोजन करते हो इस कारण कालका राज्य तुम्हारे हृदयसे उठ गया है। अब तुम चाहो तो साहिबका भजन कर सत्य लोक का साधन कर सकते हो।

सुलतान इब्राहीम की बात उस समय तो उसको अच्छी नहीं