कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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सुलतानबोध
उधर अपने नियत समय पर जब अह्मशाह इब्राहीमको लेनेके लिये सुकतबमें आया तब उसे मालूम हुआ कि, इब्राहीमको बादशाह अपने महल में ले गया है और कह गया है कि अह्मशाह वहाँही से उसको लेजावे। उसे किसी प्रकार डरना नहीं चाहिये जिस समय वह आयेगा उसी समय अपना लडका ले जायगा। यह सुनते ही अह्मशाहने बेकरार होकर सीधे बादशाहकी डचोढ़ी पर जा खड़ा हुआ और दरवानसे कहाकि, बादशाहसे जाकर कहदे कि, इब्राहीमका बाप उसे घर लेजाने आया है। जल्दी उसे बाहर भेज दो।
जैसेही अह्मशाहके आनेकी खबर बादशाहको पहुंची वैसेही बादशाहने उसे अन्दर अपने पास बुला लिया और बड़ी प्रतिष्ठा के साथ उच्चासन पर बैठाकर ईश्वरका शपथ देकर उनसे पूछा कि सच बता तुझकोसौगन्देखुदा। नामहैइसतिफलकीमादरकाक्या हैवहकिसकीदुखतरेआलीगोहर। रास्तकहदेकौनहैउसकापदर ॥
बादशाहकी बातको सुनकर अह्मशाहने कहा = “ऐबादशाह वह वही तुम्हरी लडकी है जिसपर मैं आशिक हुआ था”। सुनकरअह्ममनेकहाऐबादशाह। हैवहदुखतर आपकीबेइशतवाह॥ मादरइसकीहैवहीरशकेकमर। जिसपैमैंआशिकहुआथादेखकर॥ नामभीउसकादियाउसकोबता।दुखतरेसुलतानकाजोकुछनामथा॥
अह्मकी बातको सुनकर बादशाहके आश्रयका पारावार नहीं रहा उसने आश्रय मुद्रासे अह्मशाहसे कहा कि मेरी बेटी को मरे हुए तो मुद्दत होगयी। उसको हम लोगोंने कब्रमें गाड़ दिया उसकी तो हड्डी तक गलगयी होगी। वह अब तुम्हारे घरमें कहाँसे आगयी? क्या कोई आज तक मर करके भी जिया है।
बादशाहकी बातको सुनकर अह्मशाहने शाहजादी के जीने और विवाह होने आदिका सब वृत्तान्त कह सुनाया।