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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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Devanagarihipublished2,136 pages

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सत्यकबीराय नमः

सत्यं शुद्धं गुणातीतं कंजपर्णसमुद्भवम् ।
सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञं सद्गुरुं प्रणतोऽभ्यहम् ॥

अथ श्रीबोधसागरे

पंचमस्तत्रंगः

ग्रन्थ जगजीवन बोध

( गर्भ चिंतावनी )

धर्मदास वचन-चौपाई

धर्मदास कह सुनहु स्वामी । कहो गरभकी अन्तर्यामी ॥
कैसे जीव गरभ में आवे । कैसे जीव जठर दुख पावे ॥
कैसे जीव परवशै भयऊ । कैसे इन्द्री देह बनयऊ ॥
कैसे जीव अपने पद परसे । कैसे जीव समरथ पद परसे ॥
कैसे जीव कौल बँधावे । कैसे साहब दर्शन पावे ॥
सो सब भेद कहो गुरु ज्ञानी । घट भीतरका भेद बखानी ॥

सतगुरु-वचन

कहैं कबीर सुनो धर्मदासा । तुम घट भली बुद्धि परकासा ॥
प्रथमें सत्य नाम गुण गाऊँ । घट भीतर का भेद बताऊँ ॥
सबही जीव गर्भ में जावैं । कौल बान्ध कै बाहर धावैं ॥
चूके कौल गरभ का भाई । बारम्बार गरभ में जाई ॥
नौ नाथ सिद्धि चौरासी भारी । उनहुँ देह गरभमें धारी ॥