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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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Devanagarihipublished2,136 pages

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( ८ )

बोधसागर द्वितीयभागकी अनुक्रमणिका

विषय.पृष्ठांक.
अथ लक्ष्मण बोधकी अनुक्रमणिका संगत्ता-
चरण और उत्थानिका१४१
कृष्णजीका शरीर त्याग देना, बलभद्रजी
का संदेश और कृष्णका समझाना”
बलभद्रजीका कृष्णके शवका दाह करके
समुद्रमें बहा देना और कृष्णजीका उडीसा
के राजाको स्वप्न देना१४२
राजाका समुद्रमें स्नानको जाना और कृष्ण
के शवको पाकर स्वप्नको सच्चा समझ
कर जगन्नाथका मन्दिर बनवाना१४३
समुद्रका अपना बहला लेनेके लिये मंदि-
रको छः बार बहा ले जाना”
सातवें बार कबीर साहबका समुद्र तटपर
बैठना और समुद्रका पीछे लौट जाना”
लक्ष्मी और कबीरसाहबकी बातलाप१४४
समुद्र और कबीर साहबकी बातचीत१४६
ब्रह्मायुगकी वार्ता (लक्ष्मणबोध)१४८
समुद्रका द्वारिका दुबा लेना और कबीर
साहबका जगन्नाथके यज्ञमें जाना पण्डा
का संदेह और अनंत कबीरका दर्शन
तथा जगन्नाथमें छूत छात माननेवाले
के दंडका वर्णन१४९
ब्राह्मणका समुद्र तटपर स्नान करने जाना
वहां कबीर साहबकी देखकर घृणा
करना उसके देहमें कोढ़ फूटना राजा
विषय.पृष्ठांक.
का कबीर साहबसे प्रार्थना करके
ब्राह्मणका शरीर अच्छा कराना१५०
जगन्नाथजीकी काष्ठकी प्रतिमा बनानेके
लिये राजाको स्वप्न देना१५१
राजाका मलयगिरिसे चन्दन लाना और
मूर्ति बनानेके लिये कारीगरका खोजना
और कारीगर न मिलनेसे राजाका
विकल होना”
कबीर साहबका निरंजनके अनुरोधसे
कारीगरका रूप धरके राजाके द्वार पर
जाना और सोलह दिनतक द्वार न खोलनेका
वचन लेकर प्रतिमा बनानेको बैठना१५३
कबीर साहबका निरंजनके अनुरोधसे
कारीगरका रूप धरके राजाके द्वार
पर जाना और सोलह दिनतक द्वार
न खोलनेका वचन लेकर प्रतिमा
अपूर्ण रहना१५४
जगन्नाथजीका गोरखको शाप देना और
योगियोंका जगन्नाथ दर्शन बन्द होना”
सम्मानित और कबीर साहबका सिंहल
दीप गमन”
संक्षेपसार और ग्रन्थपर साधारण दृष्टि१५४
इति