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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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Devanagarihipublished2,136 pages

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बोधसागर द्वितीय भागकी अनुक्रमणिका

इसमें चौथे तरंगसे लेकर आठवें तरंगतक है, जिसमें-
चौथे तरंगमें भोपालबोध है जो पृष्ठ १ से आरंभ होकर पृष्ठ १६ पर समाप्त हुआ है ।

पाँचवाँ तरंग जगजीवन बोध है जो पृष्ठ १७ से आरम्भ होकर ६० पर समाप्त हुआ है ।

छठा तरंग गढ़बोध है जो पृष्ठ ६१ से आरंभ होकर पृष्ठ १०८ पर समाप्त हुआ है ।

सातवाँ तरंग हनुमानबोध है जो पृष्ठ १०९ से आरम्भ होकर पृष्ठ १३६ पर समाप्त हुआ है ।

आठवाँ तरंग लक्ष्मण बोध है जो पृष्ठ १३७ से आरंभ होकर पृष्ठ १६० पर समाप्त हुआ है ।

उपरोक्त तरङ्गोंकी अलग अलग अनुक्रमणिका इस प्रकार है-

अथ भोपालबोधकी अनुक्रमणिका

विषय.पृष्ठांक.विषय.पृष्ठांक.
धर्मदास साहबका सद्गुरुसे कालके जीवोंके मारनेके विषयमें प्रश्न करना और कबीर साहबका उत्तर५राजाका आरती चौका करके नामका उपदेश लेना११
धर्मरायका मृत्युको मनुष्योंके मारनेकी आज्ञा देनाराजाको लेकर कबीर साहबका सत्यलोक को जाना१२
सत्यगुरुका कबीर साहबको जीवों की रक्षा के लिये पृथ्वीपर आनेकी आज्ञा देना॥मंत्रि आदिका राजाको महल में न देखकर परजात्ताप और शोक करके भयसे नगर छोड़कर भाग जाना१५
कबीर साहबका जालंदर देशमें राय भोपाल के घर जाना६इति
राय भोपालका कबीर साहबको क्लेश करने की सलाह करना७अथ जगजीवनबोधकी अनु-क्रमणिका
राजाके अधीन होकर सद्गुरुका हास्य प्रकृता८धर्मदास साहबका गर्भवियय प्रश्न और सद्गुरुका उत्तर२१
रानीका सद्गुरुके अधीन होना९गर्भोत्पत्ति वर्णन२२
कबीर साहबका राजारानीको ज्ञान समझाना॥जगजीवनका गर्भके कष्ट से व्याकुल होकर साहबकी स्तुति और कीस करना२३