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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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है। अपने घोंसलेके लिये पशम (रोंआ) इकट्ठा करता है यह सुविख्यात पक्षी है। चौर होता है। रुपया इत्यादि जिस किसी चमकती वस्तुको देखता है चुरा लेता है। खाने पीनेकी वस्तु चुराता है। कभी नढनेवालोंका ऐनक लेकर भाग जाता है। लोग उसकी चोरीसे अनभिन्न रहते हैं। व्यर्थही आपसके मनुष्योंपर चोरीके दोषका आरोप करते हैं।

जे।

एक प्रकारकी चिड़िया जिसका फीका लाल रङ्ग होता है। तेरह इंच लम्बी होती है। इसे अङ्ग्रेजीमें जे कहते हैं, यह अन्यान्य चिड़ियोंकी नकल किया करती है। घोंड़ेकी तरह आवाज करती है। तिसके सुननेसे जान पड़ता है कि, बछेड़ा हिन हिनाता है। यदि कोई इस चिड़ियाको न देखे तो उसको बछेड़ेका हिन-हिनानाही निश्चय हो यह अत्यन्त मीठे सुरोंमें गाने गाया करती है।

हुडेबर्ड।

पूरबी हन्शमें एक अत्यन्त सुन्दर चिड़िया होती है। उसको अङ्ग्रेजीमें हुडे बर्ड कहते हैं। लोग उसको पिंजरेमें रखकर पालते हैं। वह बहुत समझदार होती है। क्योंकि, जब उसके बाल डुम और पर ठीक ठीक रहते हैं तो फुरतीला जान पड़ती है। पर जिस ऋतुमें उसकी डुम और पर झर जाते हैं तो अत्यन्त लज्जित और सुस्त हो जाती है। जैसे कि एक धनी निर्धन होकर लज्जित हुआ करता है।

अनल पंख।

यह एक पक्षी है आकाशमें उड़ताही रहता है, एक क्षण भी नहीं ठहरता, नर मादियोंका पारस्परिक दृष्टि संभोगही होता है इसीसे गर्भ रह जाता है नियत समय पर अंडा देनेसे वह भी पृथ्वीकी ओर गिरता है। मार्गसे ही पक जाता है बच्चे पैदा होजाते हैं एवं पृथिवीमें आनेसे पहिले बेही ऊपरको उड़ जाते हैं। कबीर साहिबने अपने हंसोंके विषयमें इसका दृष्टान्त दिया है कि सत्यगुरुके हंस कर्मोंसे नीचे गिराये जाकर भी फिर ऊपरकोही आते हैं उनका नितान्त पतन नहीं होता।

किंगाफिसर।

सेण्ट जान साहिब कहते हैं। यह एक पक्षी होता है। इस शब्दका अर्थ मछलियोंका बादशाह है। यह बड़ी बुद्धिमानोंके साथ मछलियोंको पकड़ता है। यह समुद्रके ऊपर अनलपक्षीके समान उड़ा करता है। जब किनारेपर तुन्द अँधेरी वायु चलती है उसी समय नर मादेका संग होनेसे गर्भ रहता है वह अँधेरेमें अण्डे डाल देती है। १५ दिनतक वायु बन्द रहती है सात दिनमें अण्डा पकता तथा