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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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गङ्गाराम ! यह तोप ठीक निशानेपर है वा नहीं ? गङ्गाराम तोपपर बैठ गया । एक आँख दबाकर इधर उधरसे देखा । ठीक निशाना ताककर गङ्गाराम तोपसे उतरकर अगल बैठ गया । ब्राह्मणने पुनः निशाना ठीक लगा दिया, गङ्गाराम तोप पर बैठ गया । अपना शिर टेढ़ा कर तथा एक आँख दबाके देखा तो ठीक निशाना न पाया तोपसे उतरकर अलग जा बैठा । ब्राह्मणने निशानेको ठीक सामने लगाकर कहा, गङ्गाराम ! अब देखो. गङ्गारामने जाकर देखा निशानेको भली प्रकार मसेके साथ मिला हुआ जान लिया कि, अब तो निशाना ठीक हो चुका है । बत्तीको आगसे लगाया, आग नहीं लगी फिर लगाया तो खूब नंग गई । तोपके प्यालेसे बत्तीको लगाकर आप तोपसे उड़कर दूर जा बैठा तोप छूट गई । वह तोता इसी प्रकार तोप चलाया करता था ।

फिर बहुतेरे नामकोंको भिन्न भिन्न कागज पर लिखकर सबको मिलाकर एकट्ठा करके रख दिया करता, चाहे वह किसी भाषामें क्यों न लिखा गया हो । गङ्गारामसे कहा गया कि, अमुक मनुष्यके नामकी चिट्ठी निकाल दो, तो वह तोता समस्त कागजोंको उलट पलटकर उसीके नामकी चिट्ठी निकाल दिया करता सौ रुपया मँगवाया गया उसमें एक खोटा रुपया मिला दिया गया, उस पर चिह्न किया गया सबको मिलाके एक जगह रख दिया गया । तोतेसे कहा, खोटा रुपया बाहर निकाल देना । तीतेने समस्त रुपयोंको उलट पुलटकर देखा जो खोटा रुपया था उसको निकालकर बाहर धर दिया । तहसीलदार तोतेके लिय ब्राह्मणको सौ रुपया देने लगा पर उसने स्वीकार नहीं किया ।

उज्जैनके अध्यक्ष राजा शालिवाहनके पुत्र राजा रसालुके पास एक तोता था उसकी बहुत प्रशंसा सुनते हैं । वह राजा रसालुका मंत्री था । उसकी अंतर दृष्टि थी, राजा उसकी सम्मति बिना कोई काय्य नहीं करता था । गुरु गोविंदसिंहजीके त्रिया चरित्रमें लिखा है कि—

राजा रसालुके तोता मँना—ये दोनों बड़े बुद्धिमान थे मनुष्यके समान बातें किया करते थे । एक बार ऐसी घटना हुई कि, राजा यात्राके लिये गया, तोता मँना दोनोंको घर छोड़ गया । उस समय रानी एक पराये पुरुषको बुलाकर उसके साथ बातें करने लगी, तोता मँना दोनोंने उसको शिक्षा दी कि, तू अधर्म न कर । व्यभिचार अनर्थका मूल है, मँनाने कुछ कठोर वचन भी कहे । कहा कि, तू पापिष्ठा स्त्री है । मैं तेरा सारा हाल राजासे कह दूँगी । तोता तथा मँनाकी बातें सुनकर रानी जली मरी, लौड़ीको आज्ञा दी कि, दोनोंका पिजरा उठा ला. वह उठा लाई कहा कि, मँनाकी गरदन मरोड़कर मार डाल । मँनाका काम तो उसी समय समाप्त कर दिया गया तोताके लिये आज्ञा मिली कि, इसे