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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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भविष्यमें कभी किसी जानवरको न मारूँगा उसी समयसे बन्दूक फेंक दी, शिकार न करनेकी शपथ ले ली । फाख्ता बहुत ही निर्दोष पक्षी है ।

नूहको समाचार—इसीने नूह पैगम्बरको पृथिवीके गीले और शुष्क होनेकी बात बताई थी । यों कहते हैं कि इस फाख्ताका यह नियम है कि, जब इसका नर मर जाये तो वह दूसरा नर नहीं करती । यदि मादा मर जाये तो नर अपने लिये दूसरी मादा नहीं ढूँढ़ता । जोड़ मरनेके पीछे कभी सम्भोग नहीं करता । अपनी सारी उम्र अत्यन्त पवित्रताके साथ बिताता है ।

कबूतर ।

कबूतर पवित्र पक्षी है । ये उत्तरीय अमेरिका तथा अन्यान्य देशोंमें अधिकतासे हुआ करते हैं । उनकी अनेक जातियाँ हैं । जब वे उड़ते हैं तो उनकी इतनी अधिकता होती है कि, वे दो सौ मील तक बराबर आकाशको घेर लेते हैं । गिनतीमें दो अरबके निकट होते हैं । ये कबूतर पूर्व कालसे समाचार पहुँचानेवाले पक्षी समझे जाते हैं ।

आना करिञ्जन एक यूनानी शायर कहता है कि, कबूतर पत्र पहुँचाया करते थे ।

प्लेनी—नामक एक मनुष्य जो रुमियोंका बहुत बड़ा नॅचुरलिष्ट था, लिखता है कि, मिटोनिया अर्थात् मोदीना नगरके दुर्गका घेर हुआ था उस समय हेरिटीस डिसमिस प्राविटस्के बीच बराबर पत्रादि पहुँचाया करते थे । यह भी लिखा है कि, सेण्ट टोनीसकी लड़ाईमें कबूतर पत्र तथा समाचार ले आया करते थे ।

हुद् हुद्पर कुरान—कुरानमें लिखा है कि, हुद् हुद् सुलेमान बादशाहका पैगाम पहुँचाया करता था उत्तर भी लाया करता था ।

कप्तान ब्राउन साहबका कथन है कि, चलटरहमके सरायवालेके पास एक कबूतर था उसका बारह वर्षका वय था । उसकी कबूतरी उसको छोड़कर चली गई । उसकी जुदाईसे उसको अत्यन्त दुःख था । उसने नवीन सम्बन्ध नहीं किया । दो वर्ष तक बिना स्त्रीके रहा अन्तमें उसकी अविश्वासिनी स्त्री फिर आई । चाहा कि, मैं अपने नरके साथ रहूँ उसने अनेकों युक्तियाँ कीं कि, मेरा नर मुझसे पहिलेकी तरह प्रेमसे मिले । उसने बहुत हठ किया तो उसने उसको चोंचोंसे मारकर निकाल दिया । एक रातको उसने अपने लिये एक स्थान निश्चित किया तब कबूतर कुछ प्रसन्न हुआ । कबूतरीको अपने साथ रहने दिया वह शीघ्रही मर गई । उसके छोड़ जानेसे उसने ऐसी स्वतंत्रता प्राप्त नहीं की थी