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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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वहाँके मनुष्य अनेकों प्रकारकी कहानियां कहा करते हैं। वे इस प्रकार विवरण करते हैं कि, उनके मृतक भाइयों तथा सम्बन्धियोंकी आत्मायें उनमें रहा करती हैं उनमें यह भी कहावत है कि, जब श्वेत मनुष्योंके घरके पास शब्द करें तो दुःख तथा शोक हो, यदि वे देशी मनुष्योंके घरके सामने चिल्लावें तो अनेक प्रकारकी आपत्तियां आती हैं।

मछली मार उल्लू—भी होता है वह मछलियोंका आखेट किया करता है। उसका यह नियम है कि, तालाबके किनारेपर जा बैठता है। उसकी आँख बहुत चमकीली तथा भड़कदार होती हैं। मछलियां उसकी आँखोंका प्रकाश देखनेको जलसे बाहर शिर निकालती हैं। उस समय वह उन मछलियोंको झपट्टा मारकर पकड़ लेता है, कदापि जाने नहीं देता। वह इस धोखेसे मछलियोंको पकड़ता है कि, तालाबके किनारे मछलियोंकी ताकमें चुपचाप बैठा रहता है मौका पाकर पकड़ लेता है।

कारभोरेण्ट ।

कारभोरेण्ट एक पक्षी है। चीन देशके मनुष्य इसके द्वारा आखेट किया करते हैं। एक २ मनुष्य दश बारह कारभोरेण्टको लेकर चला जाता है। समुद्रमें नाव जाती है। नावके बाहर उन समस्त पक्षियोंको छोड़ दिया जाता है। वे पानीपर इधर उधर फँल जाते हैं। मछलियां दूँदते फिरते हैं। उनकी तीक्ष्ण दृष्टियोंसे तुरंत जान पड़ता है कि, कहाँ गोता मारे। वे किसी मछलीको तीक्ष्ण चोंच द्वारा पकड़ लेते हैं तो फिर नहीं छोड़ते यदि मछली भारी हो एकके वशमें न आवे तो उसकी सहायता दूसरे सजातीय किया करते हैं उस आखेटको खींचकर अपने स्वामीके पास ले जाते हैं। उस मछलीको नावमें रखकर पुनः आखेटार्थ फिरने लगते हैं। उनमें से कोई भी आखेटमें मुस्ती करे तो उनका स्वामी एक लम्बे बाँसकी लाठी लेकर पानीपर भारता है रुष्ट होकर बोलता है। फिर वे सब अपने २ कार्यमें संलग्न हो जाते हैं। इन पक्षियोंकी शीवाके चारों ओर एक फीता लगा होता है जिसके कारण वे अपने आखेटको निगल नहीं सकते अत्यन्त ध्यान पूर्वक आखेट करते हैं गर्मीमें आखेट नहीं करते पर अक्टूबरसे मई मास तक करते हैं। यह पक्षी बत्तखके बराबर होता है यह बहुत खानेवाला है।

चमगीदड़ ।

रक्त पीनेवाली—दक्षिणी एमेरिकामें एक प्रकारकी चमगीदड़ होती है। जो बड़ी जातिका चमगीदड़ है उसके लगभग ढाई या तीन फीट लम्बे पर होते हैं। उसका यह नियम है कि, जब वह उड़ती और चलती है तो तनिकभी सूचना नहीं मिलती न शब्दही होता है। वह पशु पक्षियोंके शरीरमें इस प्रकार