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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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कि, कितनीही दूरसे इस कुत्तेको कोई वस्तु लेनेको भेजा जाय तो वहाँसे वह वस्तु लाकर उपस्थित कर देता है। इस बातकी सत्यता प्रगट करनेको उस साहबने एक चौकोर पत्थरके बीचमें अठन्नी धरकर उस कुत्तेको दिखाकर अपनी राहली। वह पत्थर सड़कके किनारे पर पड़ा था। वह साहब घोड़ेपर सवार होकर तीन मीलके अन्तर पर गया। उसने उस कुत्तेको इशारा किया कि, अठन्नी ले आ। कुत्ता उसी समय अठन्नी लेने चट्टानके पास गया। साहब अपने घरको चला गया। साहबने घर पहुँचतेही कुत्तेकी प्रतीक्षामें सारा दिन बिता दिया पर कुत्ता न आया।

पीछे यह बात जान पड़ी कि, कुत्ता स्वामीकी आज्ञा पाते ही उसी समय उस स्थान पर आ पहुँचा। जहाँ कि, वह अठन्नी दबाई गई थी। उस चट्टानका हटाना अपने सामर्थ्यके बाहरका कार्य समझकर वहाँ खड़ा होकर भूंकने लगा। इसी अवसरमें उस पथसे दो सवार निकले उस कुत्तेको कष्टमें जानकर उनमें से एकने अपने घोड़ेसे उतरकर उस चट्टानको हटा दिया। वह अठन्नी देख उसको हटाकर अपनी जेबमें रख लिया कुत्तेके तात्पर्यको न समझ अपने घरकी राह ली। कुत्ता उनके घोड़ेके साथ बराबर बीस मील तक चला गया। सांझको दोनों सरायमें ठहरे रातके समय दोनों आनन्दपूर्वक एक कोठरीमें सो रहे वहाँकी भटियारी उनकी सेवा करती रही। वह कुत्ता भी उनकी चारपाईके नीचे छिपकर बैठा रहा। जिसने वह अठन्नी ली थी उसने उसको लेकर अपनी पतलूनकी जेबमें रख दिया था रातके समय पायजामा उतारकर खूंटोके ऊपर रख दिया। जब वे दोनों सो गये तो उस कुत्तेने पतलूनको अपने मुँहसे पकड़ लिया खिड़की द्वारा बाहर कूदकर निकल भागा। उसी खिड़कीसे वह निकल गया जो गर्मीके मौसममें वायुके आवागमनके निमित्त खुली रहा करती थी। इस कारण ही उस कुत्तेका दाव घात लगा रातके चार बजे अपने घर पहुँचा। साहबने पतलूनकी जेब खोल कर देखा तो चिह्नवाली अपनी अठन्नीको उसी प्रकार पाया उस जेबमें से घड़ी तथा एक रुपया भी निकला। साहबने ढँढोरा पिटवाया कि, एक पतलूनमें एक घड़ी तथा रुपये इस प्रकार आये हैं। इससे उस घड़ी तथा पतलूनवाले मनुष्यको पता चल गया कुत्तेकी समस्त कीर्ति खुल गई। इस जातिका कुत्ता बड़ा हिम्मतो तथा दयालु होता है। अपनेसे निर्बल कुत्तोंपर कभी भी बल प्रयोग नहीं करता।

हिरण।

हिरण बहुत ही सचेत तथा चैतन्य पशु है। उसको हितक पशु तथा मनुष्य