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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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मनुष्यकीसी बातें—लेटेम्बर नामके एक मनुष्यने प्रांसककी विद्याशालामें इस प्रकार कहा है कि, एक कुत्तेको मनुष्यकीसी बोली सिखाई गई थी । वह स्पष्टरूपसे बोल सकता था आवश्यकताके अनुसार चाहता था कहवा मंगा लेता था ।

एक कुत्ता स्पष्टरूपसे एलिजिबेथका नाम लेता था । वह दूसरी बोली भी बोलता था पर साफ नहीं बोल सकता था ।

NATURAL-HISTORY.

डाक्टर गोल्ड स्मिथ साहिबकी नेचरल हिस्ट्रीमें लिखा हुआ है कि, एक बालकने एक कुत्तेको बिना सिखाये हुए मनुष्यकी बोली बोलते हुए देखा था ।

नानीकुतिया—पंजाब देशस्थ फीरोजपुर जिलेके भाई कोटकसबेमें एक कुतियाने चार बच्चे दिये । उसको एक जमींदारने ऐसा सोटा मारा कि वह मर गई । उसके बच्चे अनाथ होगये, भूखसे मरने लगे, मृत कुतियाकी माता अपने नातियोंसे स्नेह करने लगी । उनकी नानीको भी दो बच्चे हुए थे उसके दोनों बच्चे जीवित थे । अब उसने अपने दोनों बच्चोंको लाकर अपने नातियोंके साथ रखा उन छः बच्चोंका लालन पालन एक साथ उस नानी कुतियाने किया ।

डब्बू—फीरोजपुर जिलेके डरौली गाँवके पास कोपरीवाला नामक एक गाँव है । उसमें एक बहुत कृतज्ञ आज़ाकारी कुत्ता था । उसका स्वामी जो कुछ कहता वह वैसाही काम किया करता । जहाँ बिठा देता वहीं बैठ रहा । जब कहता कि, उठ अमुक स्थानको जा तो वह तुरन्तही चला जाता वह काय्य कर आता । भोजन बनता, घरके मनुष्य कहीं चले जाते तो वह चौकस बैठकर भोजनकी रखवाली किया करता । किसी मनुष्य तथा पशुकी सामर्थ्य नहीं थी कि, भोजनके निकट आ सके । उसका स्वामी आबे अथवा स्वामीकी स्त्री आबे तो आ सकती थी घरके लोग भोजन करती वार उसको भी दे दिया करते थे । स्वामीकी बिना आज़ा भोजनमें मुंह न लगाता था, उसके कितनेही गुण थे । एक दिन ऐसी घटना हुई कि, वह कार्तिक मासमें जब कि, कुत्तोंको काम सताता है कुत्ते कुतियोंके पीछे दौड़ते फिरते हैं, उस समय यह भी एक कुतियाके पीछे लगा । लोगोंने देखकर उस जमींदारसे कहा कि, तुम्हारा डब्बू कुत्ता कुतियोंके पीछे फिरता है । जब वह कुत्ता घर आया तो उसका स्वामी उस पर झिड़का । कहा कि, ऐं डब्बू ! तू भ्रष्ट हो गया, बूढ़ा होने पर भी तू कुतियोंके पीछे फिरा करता है ? क्या तुझे लज्जा नहीं आती । अब तू मेरे सामनेसे चला