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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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करावे तो फिर शीघ्र ही प्रसन्न नहीं होता जबतक कि उसका बैरी उसके सामने रहे तब तक हर्षित नहीं होता है न मनानेसे मानता ही है ।

शाही शौक—पहले रीछका कौतुक विलायतमें हुआ करता था । जो कोई वाटिकामें कौतुक देखनेके लिये जाते थे उनसे आधा पैसा लिया जाता था । लोग रीछोंकी लड़ाई तथा उसके भाँति भाँतिके कौतुक देखनेको वहाँ जाया करते थे । इङ्गलिलस्तानके बादशाह प्रथम जेम्स और एडवर्ड डालेनके समय इस कौतुकके बडे २ चतुर बाजीगर थे पर सन् १६४२में इसके रोकनेकी आज्ञा दी गई । रीछों की अनेक जातियाँ होती हैं । उसके हाथ पांव मनुष्योंके सम्मान होते हैं ।

ग्रीसनका रीछ—बहुत बलिष्ठ होता है, उसमें ऐसा बल होता है कि, पक्के पांच सौ सेरका बोझ उठा ले जाता है । यह यदि किसी शवको विना भूखके समयमें पावे तो भूमि खोदके गाड़ देता है । पड़े हुये शवको गाड़ देना तो उसकी स्वाभाविक क्रिया है । यदि किसी शिकारीको यह ग्रीसन रीछ आकर दबा ले वह मनुष्य अपने हाथ पेर फँलाकर मुर्दोंके सम्मान लेट जावे, तो रीछ उसे मुर्दा समझ उसी समय एक गढ़हा खोद उसको उसमें डाल ऊपरसे मिट्टी भर देता है । कहते हैं कि, भेड़िया चाहे कँसाही भूखा क्यों न हो पर ग्रीसन रीछके ढोंके हुए शवको कभी नहीं छूता । इस पशुमें यह आदत और भी है कि, वह आखेटको बगलमें नहीं लेता उसके पञ्जे रखानी जैसे तीक्ष्ण होते हैं अपने आखेटको देख खड़ा हो सहसा उस पर टूट अपने अगले पञ्चोंसे उसे मारता है ।

रीछकी प्रतिष्ठा—किसी किसी देशमें रीछ बड़ा प्रतिष्ठित जीव माना जाता है । वहाँ जब कोई रीछ दिखाई दे तो लोग अत्यन्त नम्रतापूर्वक गीत गाते हैं कि, ऐ रीछ ! हमारे अपराधको जो कि, हम बरछी लेकर आये आप पर आक्रमण किया आपसे लड़ाई की इसे क्षमा कीजिये हमारे अपराधसे रुष्ट न होजिये । आप श्रेष्ठ हो । आप मुझपर आक्रमण न कीजिये, न हमको घायल कीजिये । उसकी प्रशंसाके गीत ये हैं कि, आप श्रेष्ठ तथा बूढ़े हो आप बालोंकी कुर्ती पहने हुये हो तो भी श्रेष्ठ हो तथा पूजने योग्य हो ।

स्तुतिसे खुशी—सर जान रिचर्डसन साहबका कथन है कि, एक वृद्ध तथा स्त्री नहरके किनारे पर बैठे थे । उन्होंने देखा कि, एक बलिष्ठ भयानक रीछ नहरके दूसरे किनारेसे उनकी ओर चला आता है । उस मनुष्यके पास किसी प्रकारका हथियार नहीं था । उसने बचनेकी कोई युक्ति न देखी तो उस रीछकी प्रशंसा करने लगा । उसके स्वच्छ स्वभाव तथा बड़प्पनकी बड़ाई करने लगा । नम्रता पूर्वक कहने लगा कि, मैंने आपकी तथा आपके घरानेवालोंकी