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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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अपने दांतोंसे पकड़ लिया और अपने स्वामीको अपने ऊपर रख घरको ले भागा बीचमें कहीं न ठहरा, पर्वत पर अपने खेममें जा पहुँचा। अपने मालिकको उसकी स्त्री तथा लड़कोंके पाँव पर धर दिया। अपने मालिकको कुशल मङ्गलके साथ उसके घर पर पहुँचा दिया। पथकी थकावटसे स्वयम् आप उसी समय गिरकर मर गया। उस घोड़ेके लिये उस जातिके सब मनुष्य दुःख करने लगे। अरबी सायरोंने उस कृतज्ञ वीर घोड़ेकी प्रशंसामें अनेक कविता बनाई है। अरबमें उस घोड़ेकी भलाईकी चर्चा अब तक चली आती है।

बाजीगरोंके घोड़े—फरीदकोट राज्यमें बजीरसिंहजीके पास फ्रांस देशके ऐसे बाजीगर आये थे, जिनके कि, पास ऐसे घोड़े सिखाये हुये थे जो कि, उन घोड़ोंके कौतुकके सामने मनुष्योंके कौतुककी क्या बात है ? उन्होंने अपने घोड़ोंको अनेक गुण सिखाये थे जिससे देखनेवाले सदा दंग रहा करते थे।

बैल, सांड, बछड़ा और गऊ

बैलसे आदमीकी बातें—गुलजार आदममें मुसलमानोंकी हदीसके अनुसार लिखा है कि, आदम जब बैकुण्ठसे निकाला गया तो जिबराईलने आदमको खेती करना तथा हल जोतना सिखला दिया। आदमने बैलको हल जोतनेमें लगाया, उसने बैलको डण्डा मारा, उस समय बैलने आदमसे कहा कि तूने मुझ निर्दोषको क्यों मारा ? आदमने उत्तर दिया कि, तू आज्ञा नहीं मानता जो आज्ञा नहीं मानता वह मारा जायेगा। बैलने कहा कि, ऐ आदम ! तू स्वयम् आज्ञा नहीं मानता, खुदाकी आज्ञा न माननेके कारण ही बैकुण्ठसे बाहर निकाला गया है, निर्दोष मुझको क्यों मारता है ? यह बात सुनकर आदम दुःखी हुआ। खुदासे दोहाई मचाकर कहने लगा कि, ऐ खुदा ! तू देख, मुझे बैल भी ताने दता है। खुदाकी आज्ञा हुई कि, ऐ जिबराईल ! तू पृथिवी पर जा सब पशुओंकी जिह्वा बन्द करदे, उसी समय जिबराईल पृथिवीपर आये सब पशुओंकी जिह्वा बन्द करदी। सब गँगे हुये, फिर किसीमें वार्तालापकी सामर्थ्य न रही। इससे पहले सभी पशु मनुष्योंके समान बातें चीतें किया करते थे।

पूर्वके साधु—पञ्जाब प्रदेशस्थ फीरोजपुरान्तर्गत मौजे कोयरीवाला जिसको भाईका कोयरीवालात्री भी कहते हैं, यह मोगह तहसीलमें है। सन् १८८६ ई० में यहाँ एक घटना संघटित हुई ऐसा हुआ कि, इस गामके नामके मुसलमान जुलाहेके घरमें एक गाय रहती थी। उस गायने एक साथ दो बच्चे जने थे। दोनों अत्यन्त सुन्दर और काले रङ्गके थे उनका शरीर चमकता था। लोगोंने समझा कि, जो जोड़ा बच्चा उत्पन्न हो उसको पुण्यार्थ देना उचित है।