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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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उसके निकालनेकी अनेक युक्तियां की पर वह नहीं निकली । वह दौड़कर बस्तीमें से एक संड़ासी ले आया उसके पांवको खूब जोरसे दबाकर उस संड़ासी द्वारा उस गुलमेखको पकड़ बाहर निकाल दी । उस हाथीको सुख मिला उस मनुष्यको धन्यवाद देनेके बदले उसने उस मनुष्यको अपने सूँडसे पकड़ अपने शिरपर बैठकर उसका आभिवादन किया ।

पुत्रसे प्रेम-बनारसके राजाके पास एक बहुत मस्त हाथी था, उसने किसी अपराधके कारण महावत मार डाला । फीलबानके मरनेपर उसकी स्त्री अत्यन्त क्रुद्ध तथा दुःखी होकर हाथीके निकट अपने छोटे बच्चेको भी उसके सामने डाल कर बोली कि, ले इसको भी मार डाल । क्योंकि, अब इसका पालन कौन करेगा ? उस हाथीने धीरेसे उस बच्चेको उठाकर अपनी गरदन पर बैठकर इशारा किया कि, अपने पिताके स्थान अब यह फीलबानी करेगा ।

बनेलेकी बुद्धिमत्ता—सम्बत् १८६० विक्रमीमें पञ्जाबदेशके आनन्दपुरके चारों ओर बड़ा भारी वन था । वहाँ एक गाँवके समीप मक्काके खेत थे । एक खेतमें मँचान पर एक मनुष्य बैठा रखवाली कर रहा था । रातके समय उसके निकट एक हाथी आया, उसको मँचानसे उतारके पृथ्वी पर रख दिया । उसके सामने उसने अपना एक पांव दिखलाया उस समय चाँदनी रात थी । उसने देखा तो हाथीके पांवमें लकड़ीकी एक मेख गड़ी हुई दिखाई दी । उस मनुष्यने लकड़ीको पकड़कर खींच लिया, जब हाथीको परम सुख मिला तो उसने उसको अपने शिरके ऊपर रखकर उसी मँचान पर रख दिया, उस दिनसे हाथीका यह नियम हुआ कि, प्रति दिन दूसरोंके खेतसे मक्कियाँ उखाड़ उसके मँचानके समीप रखकर चले जाना । अन्यान्य मनुष्य उस मनुष्य पर चोरीका दोष लगा दोहाई मचाने लगे कि, यह मक्काकी चोरी करता है । उस मनुष्यने शपथ की कि, मेरा यह कार्य नहीं है, अन्तमें मनुष्य रातको छिपकर देखने लगे तो देखा कि, एक बनेला हाथी मक्का उखाड़कर उसके मँचानके निकट ढेर कर जाता है लोगोंने आग जला तथा दूसरे २ भय दिखाकर उस हाथीको इस कार्यसे रोका ।

मक्कारीका बदला—एक चित्रकार हाथीको बुला उसके मुँहमें फल तथा चारा देने लगा । वह हाथी अपनी सूँड ऊपर किये खड़ा होता वह उसके मुँहमें डालता जाता । कुछ दिनके पीछे बहुत चारा डालनेके भयसे उसने बन्द कर दिया केवल चारा डालनेका बहाना मात्र करने लगा । हाथीने जाना कि, यह मेरे साथ हँसी करता है । इस बातसे असन्तुष्ट होकर अपनी सूँडमें जल भर उसके चित्रोंपर डालकर नष्ट कर दिये ।