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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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हाल लिख रहा था कि, घरके लोग आये उस बन्दरको कुरसीपर बैठकर लिखता हुआ देखकर आश्चर्यान्वित हुये कि, बिना पढ़ाये तथा बिना सिखाये इस बन्दरने कैसे लिखना जाना ? क्या मनुष्य क्या पशु सभी वासनाओंके फन्दमें फँसे हुए हैं । इसी बातको निम्नलिखित गजलमें भी दिखाया है --

नहीं कोई आदमी कोई बन्दर । नचाता रुहको करमें कलन्दर ॥

करमके जालमें यह जीव फन्दा । परीशां हाल यह फिरता है घर घर ॥

हुवा मुफ़लिस शहंशह आलमोंका । कि रि रता माँगते यह भीख दरदर ॥

सिग त तीनों वहम अरवा अनासर । किये घरखास इस अखलास अन्दर ॥

हवस नफसानिये आजिज दबाया । कि शहबतमें फँसा योगी मछिन्दर ॥

आदमी और मनुष्य सबको करम नचा रहा है कभी आदमी बना देता है तो कभी बन्दर बनाकर नचाता है । इससे मत्स्योदर जैसे योगियोंको भी नहीं छोड़ा ।

मृगेन्द्र ।

क्रोधी तथा बदला लेनेवाले मनुष्य शेरकी योनिमें जाते हैं, मृत्युके पीछे शेर तथा चीते आदिकी देह पाते हैं उनकी पहली आदतें उनके साथ होती हैं । शेर बड़ा वीर तथा साहसी होता है । यदि कोई शेरको धमकावे तथा गदहा आदि कहे तो वह बिना विलम्बके तुरन्तही उस पर टूट पड़ता है । या तो उसको मार लेता या उसके मारनेके उद्योगमें आपही मर जाता है । जो शेरको ललकारेगा वो कदापि जिन्दा न बचेगा । मैंने अपनी आखोंसे देखा है कि, गिड़गिड़ाने तथा प्रशंसा करनेसे शेर वशमें हो जाता है, उसका क्रोध ठण्डा पड़ जाता है । शेर बड़े उच्च स्वभावका होता है सुतरां बादशाहों तथा अमीरोंके शेरखानोंमें जो रक्षक रहते हैं वे शेर तथा चीतोंकी खुशामद किया करते हैं कि, आप अत्यन्त श्रेष्ठ हैं, आप उच्च घरानेके हैं, आपके बापदादे बहुत वीर तथा श्रेष्ठ थे वैसे ही आप भी हैं । आप बड़े पिताके पुत्र हैं । ये बस बातें सुनकर शेरका मन प्रसन्न तथा ठण्डा रहता है, यह अपने साथ किये हुए वर्तावको अच्छी तरह जानता है ।

कुमरसिंहजीका सिंह—पूर्वीय भारतके डुमरोंव रियासतके पास जगदीशपुर रियासत है । वहाँके राजाका नाम कुँवरसिंह था । एक समय उनका पालतू शेर छूटकर नगरके चौकमें जा बैठा । उस समय नगरके समस्त द्वार बन्द होगये थे, भयके मारे कोई घरके बाहर न निकलता था । राजाको समाचार मिला कि, आपका मोतीलाल शेर छूट पड़ा है, नगरका द्वार बन्द हो रहा है । राजा कुँवरसिंह स्वयम् ढाल तलवार लेकर जा पहुँचे उसका नाम लेकर कहा कि, ए