कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextअकेला न ला सका। फिर वह वनमें गया दो रात दिन वहाँ रहा इस बातपर उसकी स्त्री अत्यंत रुष्ट हुई। फिर जब वह आया उसकी स्त्री बहुत रोई। उससे नम्रता पूर्वक कहने लगी कि, मैं अब हर्ष पूर्वक इस बाबरची खानेमें ही रहूँगी तू मुझको मत छोड़। उसने उत्तर दिया कि, तूने मुझको बारंबार वनमें भेजा, अब मैं वनको हृदयसे चाहता हूँ। मैं जाऊँगा सदैव वनमें रहूँगा। इतना कहकर वह पुरुष बाबरचीखानेसे चला गया हृश्चदेशके वनमें घुसकर वहाँही रहने लगा वह बन्दर हो गया वहाँ उसीसे सब बन्दर उत्पन्न हुए।
एटलेश—एमेरिका देशके चतुष्पाद पशुवोंमेंसे यह एक प्रकारका बन्दर है। उसकी विचित्र चाल है। वह अनेक रीतियोंसे चलता है। कभी तो पशु-वोंकी तरह चारों पैरोंसे चलता है, कभी दोनों पावोंसे मनुष्यके समान चलता है, दोनों चालें उसके वशमें है। वह अन्यान्य बन्दरोंको भ्रान्ति नहीं है। गम्भीर स्वभाव तथा रजीदः चेहरा रखता है। न वह चिलबिल्ला है, न कुछ क्षतिही पहुँचाता है। उसकी कहानियाँ बड़ीही विचित्र तथा आश्चर्यप्रद हैं। वह अपने मालिकसे नम्रता पूर्वक बहुत प्रेम करता है।
शराब लानेवाला—अकालटा साहब अपनी पश्चिमीय इतिहास पुस्तकमें इस प्रकार लिखते हैं कि, लोगोंने इस प्रकारके एक बन्दरको कलवरियामें मदिरा लाने भेजा। उसके एक हाथमें मदिराकी बोतल तथा दूसरेमें पैसे दे दिये। वह कलवरियामें गया, किसीकी सामर्थ्य नहीं थी कि, बिना मदिरा दिये उसके हाथसे पैसे ले ले, पहिले मदिरा दे दे तो मूल्य पावे। कलवारने पहिले मदिरासे बोतल भर दी, उसने मूल्य दे दिया। यदि पथमें कोई पाजी लड़का उसपर पत्थर मारता तो बन्दर भी अपने हाथसे बोतल अलग धरकर उस लड़के पर ऐसे पत्थर मारता कि, उसे भागना पड़ता। कोई भी लड़का उसका सामना करने न ठहरता सब भाग जाते एकदम मैदान साफ हो जाता, मदिराकी बोतल लेकल कुशल मङ्गलसे अपने स्वामीके पास पहुँचता। यद्यपि वह बन्दर बहुत मदिरा पीता था तो भी अपने स्वामीकी आज्ञा बिना उसका एक बूंद भी न छूता था। इस बन्दरकी आठ जातियाँ हैं, वे सब अत्यन्त बुद्धिमान्नीसे कार्य किया करती हैं।
चेम्पेनका आकार—यह बन्दर हृश्चदेशके बहुत तपनेवाली भूमिका रहनेवाला है। यह मनुष्यके समान होता है मानों मनुष्य ही है। उसके सारे शरीर पर बड़े २ बाल होते हैं उसके सिर तथा पीठ पर अधिक बड़े बाल होते हैं। उसके कान पतले होते हैं, उसपर बाल नहीं होते। मनुष्यके कानके