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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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अपने मालिकके लड़केवालोंके समान माने जानेसे अत्यन्त हर्षित होता था ।

हन्शका बन्दर—हन्शदेशका एक प्रकारका बड़ा बन्दर होता है जो चार फीटसे लेकर पाँच फीट तक ऊँचा होता है । वह मनुष्योंकी तरह दोनों पाँवसे चलता फिरता है, प्रायः सारे कार्य मनुष्योंके ही समान करता है । जहाँ कहीं हाथी दांतोंको पाता है उठा लेता है उसको सुरक्षित जगह रखनेकी युक्ति न जाननेसे हाथमें ही लिये फिरता है । यदि वह आपसे गिर पड़े तो गिर पड़े । अथवा उसको लिये बोझसे थक जाय तो छोड़े । यह मनुष्यकी तरह झोपड़ी बनाता है । बच्चा मरने पर माँ मुरदा बच्चा लिये फिरती है । यहाँ तक कि, वह सड़ गलकर टुकड़े २ होकर उसकी गोदसे गिर जाता है । यह बन्दर बड़ा क्रोधी और बलिष्ठ होता है । मनुष्य उसके एक थप्पड़से मर जाता है ।

रंग कायम—एक प्रकारका बन्दर है, वह स्याही चूसता है तथा लेखिनी चुरा लेता है जहाँ कहीं मदिरा इत्यादि पावे तो पी जाता है शीघ्रही अपने नामको जान लेता है, जो उसका नाम लेकर पुकारे तो उसके पास चला जाता है । वह बच्चोंके साथ खेला करता है, जैसे लड़के लड़कियाँ करती हैं इसी प्रकार वह अपनी लम्बी भुजा लड़कों की गरदनके चारों ओर डालकर खेलता है । लड़कोंकी रोटीसे भाग लेता है, इसके पीछे उनके साथ खेलना आरम्भ करता है भाँति भाँतिकी नकलें तथा कौतुक किया करता है । छोटे छोटे लड़कोंकी तरह क्रीड़ा कौतुक किया करता है । लड़के इसके साथ खेला चाहें वह न चाहता हो तो उनकी उँगली अपने दांतोंसे दबाकर खेलनेमें अपनी अरुचि प्रगट किया करता है । दूसरे छोटे छोटे बन्दर उससे धूँछता करते हैं तो वह उनकी दुम पकड़ खींचता हुआ उन्हें दण्ड दे देता है, जब वे चिल्लाते हैं, तो उनको छोड़ देता है । वह गम्भीरतासे रहता है । पथिकोंके खानेके समय टेबुलके समीप जा बैठता है । उसके भोजनके समय कोई हँसे तो उसपर फूँकता गाल फुलाता हुआ ठठठा करनेवालेकी ओर क्रोधकी दृष्टिसे देखता है । जबतक भोजन न कर चुके तबतक एकान्तमें रहनेको अच्छा नहीं समझता । यदि चाहे वस्तु न मिले तो हाथ पसार कर लौटता फिरता है । जो वस्तु उसके सामने आवे उसको तोड़ ताड़कर बिगाड़ डालता है और (रा-रा-रा-के शब्दसे) चिल्लाया करता है ।

शव लेनेवाला—फारबस साहबका वर्णन है कि, मेरे मित्रोंमें से एकने एक बेंदरीको बन्दूकसे मार दिया उसके लाशको वह अपने खेमेंमें घसीट ले गया । चालीस पचास बन्दर घुड़कते और धमकाते उसके खेमेकी ओर आये । पर जब उस साहबने अपनी बन्दूकको उनके सामने किया तो वे दूर खड़े हो गये तो