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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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Page 799

फिर कुरानमें देखो :—

وَإِنَّ مِثْلَهُمْ لَأَوَّلُونَ

अर्थात्—कोई मनुष्य नहीं अर्थात् सब मनुष्य भले तथा बुरे एक बार अवश्यही नरकमें जावेंगे । अतः पहली बात पिछली बात सत्य हो । यह दोनों बातें एक दूसरेके विरुद्ध हैं । यदि एकको सत्य माना तो दूसरी झूठ होती है परन्तु यह दोनों आयतें सत्य हो सकती हैं कि, जिनके कर्म भले हैं वे इस शरीरसे नरकको न जायेंगे, पर किसी दूसरे शरीरमें जावेंगे । उनसे किसी प्रकारका पाप हो तो वास्तवमेंही संसार चक्रमें पड़कर नरकमें चले जायेंगे ।

५० तारीख मुहम्मदी—तालीम मुहम्मदी नामक पुस्तकके अनुसार इस प्रकार लिखा है कि, तजकिरतुलमौलामें काजी सनाउल्लाने इस विषयकी जाँचमें कि, मृत्युके पीछे मनुष्यकी आत्मा कहाँ जाती है कुरान तथा हदीससे बड़े विचारके साथ बहुतसा वृत्तान्त लिखा है । जिसका संक्षेप यह है । दो मकान हैं । एकका नाम सज्जैन है । अरबीमें सज्जैन बन्दीगृहको कहते हैं । अतः सज्जैन अत्युक्तिसे बड़ा जेलखाना है काफिरोंकी आत्मायें उसमें बन्द रहती हैं । दूसरा मकान अल्लैन है अल्लैन अल्लैयाका बहुवचन है । अर्थात् ऊँची खिड़कियाँ । अर्थात् वैकुण्ठ जहाँ मुसलमानोंकी आत्मायें जाती हैं ।

अबुदाऊदअबुहरीरा—का कथन है कि, हजरतने फ़रमाया है कि, वैकुण्ठमें एक पर्वत है वहाँ पर मुसलमानोंके बच्चोंकी आत्मायें जाती हैं । इवराहीम तथा सायरा उनका पालन करते हैं । जब महाप्रलय आवेगी तब उन बच्चोंकी आत्मायें उनके माता पिताको सौंप देंगे ।

मकदूलसे खायत है कि, मुसलमानोंके बच्चे पक्षियोंके सूतमें वैकुण्ठ में उड़ते फिरते हैं, फिरउनके घरानेके बच्चे एक काले रङ्गके पक्षीके समान हैं । जो प्रातःकाल तथा संध्याको नरकके सामने लाये जाते हैं । कुछ हदीसोंमें हैं कि, मुसलमानोंकी आत्मायें पक्षियोंके समान वैकुण्ठके वृक्षों पर उड़ती फिरती हैं । महाप्रलयके दिन शरीरोंमें आयेंगी पर शहीदोंकी आत्मायें एक हरे जानवरके पेटमें प्रविष्ट होती हैं रातके समय यानी बसेरेके समय उन कन्दीलोंके बीच जो कि खुदाके सिंहासनके नीचे लटकती हैं आकर बसेरा लेती हैं ।

समीक्षा—यहाँ यह बात समझना चाहिये कि, आत्माका कैद रहना सम्भव नहीं है शरीरके साथ वह सचमुचही कैद रह सकती है । यह भी ठीक नहीं कि, आत्मा किसीके प्रतिपालनका मुहताज हो । इबराहीम तथा सायरा