कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextछतपर फिर रहे थे । उस समय एक सुन्दरीरमणी आपको दिखाई दी । वह उरबाह नामक मनुष्यकी स्त्री थी । उसको देखकर हजरतने आसक्त हो अपने नौकरको भेजकर उसे अपने पास बुलवाया । उसके साथ सम्भोग किया । निवृत्ति होनेके पीछे उस स्त्रीको बिदा किया । वह स्त्री अपने घरको चली गयी । कुछ दिनोंके पीछे उस स्त्रीने आपसे कहला भेजा कि मुझे तेरा गर्भ रह गया है । यह बात सुन कर दाऊदने उस स्त्री के पति उरबाहको एक लड़ाईमें भेजकर मरवा डाला । जब वह मारा गया तो उसकी स्त्रीको आपने महलमें डाल दिया । जब दाऊदने ऐसा किया तब खुदा दाऊदपर अति क्रुद्ध हुआ । खुदाके क्रोधसे दाऊद बहुत घबराया वह रात दिन रोया करता था । खुदासे प्रार्थना किया करता था कि तू मेरे पापोंको क्षमा कर । जब वह बहुत रोया तब खुदात आला उसपर दयालु हुआ मुहम्मदी हदीसमें आया है और कुरानमें सूरत (स्वाद) की तफसीरमें लिखा है कि, जब दाऊदके ऊपर खुदा दयालु हुआ तब उससे कहा कि हे दाऊद ! मैंने तेरे समस्त पाप तो क्षमा कर दिये पर उरियाहके साथ जो तूने गुनह किया है मैं उसको क्षमा नहीं कर सकता क्योंकि वह पाप तो जो स्वयम् उरियाह क्षमा करे तो क्षमा किया जावे । तू उसीसे क्षमा प्रार्थना कर । तब दाऊदने कहा कि उरियाह तो मर गया अब मैं किससे क्षमा प्रार्थना करूँ ? तब खुदाने कहा कि मैं तेरे लिये उरियाहको फिर जीवित करूँगा । तू उसकी कब्र पर जा क्षमा प्रार्थना कर । दाऊद उरियाहकी कब्रपर जाके पुकारा उरियाह उरियाह, वह बोला कौन है जिसने मुझे सोते हुयेको जगाया, मैं सुखपूर्वक सो रहा था । वह बोला कि मैं दाऊद हूँ । उसने कहा कि, हजरत आपने कैसे कष्ट उठाया और यहाँतक पधारे । वह बोला कि ऐ उरियाह । मैंने तुझे लड़ाई पर भेजा वहाँ तू मारा गया । तू मेरा यह अपराध क्षमा कर । तब उरियाहने उत्तर दिया कि हजरत इसमें आपका कोई दोष नहीं नौकरका तो यही कार्य है कि अपने स्वामीके लिये प्राण दे, मैंने आपको क्षमा कर दिया । तब दाऊद प्रसन्न होकर पलट आया । फिर खुदाकी ओरसे दाऊदको यह आवाज आई कि ऐ दाऊद ? अपराध क्षमा करानेमें धूर्तता और कपट नहीं चाहिये । वरन् अपने पापोंको उरियाहसे स्पष्ट रूपसे कहो कि, मैं दयामान तथा न्यायी हूँ । दाऊद पुनः उरियाहकी कब्र पर गया कहा कि, ऐ उरियाह ! तू मेरा अपराध क्षमा कर । तब उरियाहने उत्तर दिया कि, मैंने तो पहलेही क्षमा कर दिया था आपने फिर यहाँ आनेका क्यों कष्ट उठाया । दाऊदने कहा कि, मैंने तेरी स्त्रीके साथ कुकर्म किया, उसको प्राप्त करनेके लिये तुझको लड़ाई पर भेजकर मरवा डाला तेरी स्त्रीको अपने महलमें डाल लिया । तू मेरा यह अपराध क्षमाकर ।